भारतीय कॉपीराइट कार्यालय का AI को किसी भी रचना का श्रेय देने से इनकार
भारतीय कॉपीराइट कार्यालय ने साफ कर दिया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाए गए किसी भी आर्टवर्क का कॉपीराइट तो मिल सकता है, लेकिन उस AI को लेखक नहीं माना जाएगा।
यह मामला तब सामने आया, जब अमेरिकी AI शोधकर्ता स्टीफन थैलर ने अपनी AI डबस (DABUS) को एक आर्टवर्क 'ए रीसेंट एंट्रेंस टू पैराडाइज' का निर्माता बताते हुए उसका कॉपीराइट रजिस्टर कराने की कोशिश की।
कार्यालय ने खारिज किया आवेदन
कॉपीराइट कार्यालय ने रजिस्ट्रार ऑफ कॉपीराइट्स प्रोफेसर उन्नत पी पंडित की अगुवाई में 31 अगस्त को थैलर के आवेदन को खारिज कर दिया।
कार्यालय ने बताया कि भारतीय कानून के अनुसार, केवल इंसान ही किसी रचना के लेखक माने जा सकते हैं। भले ही AI कोई नई और मौलिक रचना भी कर दे, फिर भी इसका श्रेय उस इंसान को ही मिलेगा, जिसने उसे बनाने में भूमिका निभाई है। कानून के मुताबिक, वही व्यक्ति इस रचना को बनाने के लिए जिम्मेदार माना जाता है।
थैलर से कहा गया था कि वे डबस की जगह अपना नाम लेखक के तौर पर दें, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया।