एस्ट्रोयड्स के टकराव से तपने के बाद बनी थी धरती की भूगर्भीय बनावट
धरती के शुरुआती दिन हमारी सोच से कहीं ज्यादा उथल-पुथल भरे थे। एक नए अध्ययन से पता चलता है कि 4 अरब साल से भी पहले लगातार हुए एस्ट्रोयड्स के टकरावों से धरती इतनी तप गई थी कि इसकी सतह लंबे समय तक बहुत गर्म और अस्थिर बनी रही। यही वजह है कि उस दौर के जिरकॉन क्रिस्टल तो मिलते हैं, लेकिन उस समय की लगभग कोई भी साबुत चट्टान अब तक बची नहीं है।
सिलिका की बढ़ोतरी ने महाद्वीपों की नींव रखी
इन एस्ट्रोयड ने सिर्फ तबाही ही नहीं फैलाई, बल्कि इन्होंने धरती की क्रस्ट को फाड़ दिया और मेंटल के कुछ हिस्सों को पिघला दिया। इससे नया मैग्मा बना और धरती की सतह बार-बार रीसाइकिल होती रही। इसी प्रक्रिया की वजह से क्रस्ट में सिलिका की मात्रा बढ़ गई, जिसने आगे चलकर महाद्वीपों के निर्माण की नींव रखी।
इतनी हलचल के बावजूद शुरुआती दौर की धरती पर पानी मौजूद था, जब लगभग 3.9 अरब साल पहले एस्ट्रोयड के टकराने की रफ्तार कम हुई, तब जाकर धरती इतनी ठंडी हो पाई कि बड़े-बड़े महाद्वीप अपनी जगह बन पाए और टिके रह सके।