AI की ऊर्जा खपत पर सैम ऑल्टमैन के बयान पर श्रीधर वेम्बू ने दी प्रतिक्रिया
क्या है खबर?
OpenAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सैम ऑल्टमैन ने हाल ही में AI मॉडल को ट्रेन करने में लगने वाली ऊर्जा को लेकर एक अहम बयान दिया था। अब उनके इस बयान पर भारतीय टेक कंपनी जोहो के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है। यह मामला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सामने आया, जहां ऑल्टमैन की टिप्पणी तेजी से वायरल हुई और इस पर देश-विदेश के टेक विशेषज्ञों के बीच गंभीर बहस शुरू हो गई है।
तर्क
ऑल्टमैन ने क्या तर्क दिया?
ऑल्टमैन ने कहा कि लोग अक्सर AI मॉडल को ट्रेन करने में लगने वाली बिजली और डाटा सेंटर की खपत पर सवाल उठाते हैं, लेकिन एक इंसान को समझदार बनने में भी करीब 20 साल लगते हैं। इस दौरान वह जो खाना खाता है, पढ़ाई करता है और अनुभव हासिल करता है, वह भी ऊर्जा का ही रूप है। उनका तर्क था कि जैविक और मशीन लर्निंग, दोनों प्रक्रियाओं में संसाधनों की जरूरत होती है।
आपत्ति
वेम्बू ने जताई आपत्ति
वेम्बू ने इस तुलना पर साफ आपत्ति जताई और कहा कि वह ऐसी दुनिया नहीं देखना चाहते जहां टेक्नोलॉजी को इंसान के बराबर समझा जाए। उनके मुताबिक, तकनीक का मुख्य काम इंसान की मदद करना है, न कि उसकी जगह लेना या उसके समान दर्जा पाना। वेम्बू ने यह भी कहा कि टेक्नोलॉजी को शांत तरीके से बैकग्राउंड में रहकर काम करना चाहिए और इंसानी जीवन, मूल्यों तथा सोच पर हावी नहीं होना चाहिए।
बहस
ऊर्जा से आगे बढ़ी नैतिक बहस
इस पूरे घटनाक्रम ने AI और ऊर्जा खपत से जुड़ी बहस को एक बड़े नैतिक और सामाजिक सवाल की ओर मोड़ दिया है। एक पक्ष डाटा सेंटर, बिजली की खपत और पर्यावरण पर असर जैसे आंकड़ों पर ध्यान देता है, जबकि दूसरा पक्ष इंसानी पहचान और तकनीक की सीमाओं पर जोर देता है। जैसे-जैसे AI मॉडल बड़े और जटिल होते जा रहे हैं, वैसे-वैसे यह सवाल भी उठ रहा है कि समाज में उनकी भूमिका क्या होनी चाहिए।