स्काईरूट CEO ने ऑर्बिटल डाटा सेंटर को बताया AI के लिए सबसे सस्ता विकल्प
स्काईरूट एयरोस्पेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पवन कुमार चंदाना मानते हैं कि अगले 5 सालों में अंतरिक्ष में बनने वाले डाटा सेंटर कंप्यूटिंग के सबसे सस्ते विकल्प होंगे।
बेंगलुरु में एक समिट में उन्होंने बताया कि कक्षा में लगे सोलर पैनल पृथ्वी के मुकाबले कहीं ज्यादा बिजली बनाते हैं क्योंकि अंतरिक्ष में हवा नहीं होती, इसलिए ये पैनल बिना किसी रुकावट के 24 घंटे चलते रहते हैं।
बड़ी कंपनियां कर रहीं ऑर्बिटल डाटा सेंटर की तैयारी
चंदाना ने इस बात पर जोर दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती मांग कंपनियों को सस्ते और पर्यावरण के अनुकूल कंप्यूटिंग के लिए पृथ्वी से बाहर विकल्प तलाशने पर मजबूर कर रही है। उन्होंने कहा, "मुझे पूरा विश्वास है कि कंप्यूटिंग की सबसे कम लागत अंतरिक्ष में ही होगी।"
स्पेस-X, अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसे बड़े नाम अभी से ऑर्बिटल डाटा सेंटर पर काम कर रहे हैं। इनके शुरुआती प्रोटोटाइप अगले 2 या 3 सालों में लॉन्च हो सकते हैं और अगर, सब कुछ ठीक रहा तो इनका बड़े पैमाने पर उपयोग भी फिर दूर नहीं होगा।
हर महीने रॉकेट लॉन्च की योजना
विक्रम-1 रॉकेट के सफल लॉन्च के बाद स्काईरूट अब हर महीने लॉन्च करने की तैयारी में है। साथ ही, यह दोबारा इस्तेमाल होने वाले रॉकेट जैसी नई तकनीकों पर भी काम कर रही है।
कंपनी सैटेलाइट ब्रॉडबैंड और डायरेक्ट-टू-मोबाइल कनेक्शन जैसी अगली जनरेशन की अंतरिक्ष सेवाओं के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार कर रही है।
चंदाना का मानना है कि इन नवाचारों की मदद से 2035 तक वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 3 गुना बढ़ सकती है, जिससे अंतरिक्ष पहले से कहीं ज्यादा सुलभ और उपयोगी बन जाएगा।