सोशल मीडिया पर तस्वीर साझा करना AI के कारण बन सकता है गोपनीयता के लिए खतरा?
क्या है खबर?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक के कारण सोशल मीडिया पर तस्वीर साझा करना आपकी गोपनीयता के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। जियोस्पाई AI नाम का एक नया टूल बिना लोकेशन टैग या मेटाडाटा के भी फोटो की जगह का पता लगा सकता है। यह तकनीक लोगों को सोचने पर मजबूर कर रही है कि ऑनलाइन तस्वीरें पोस्ट करना कितना सुरक्षित है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह टूल भविष्य में प्राइवेसी के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
काम
कैसे काम करता है जियोस्पाई AI?
जियोस्पाई AI फोटो में दिख रही चीजों का बहुत ही गहराई से विश्लेषण करता है। यह इमारतों, सड़कों, पेड़ों, पहाड़ियों और आसपास के माहौल को पहचानकर लोकेशन का अनुमान लगाता है। इसके लिए किसी छिपे हुए डाटा या टैग की जरूरत नहीं होती। केवल तस्वीर ही काफी होती है। यह दुनियाभर में जगहों का मिलान कर सकता है और कुछ मामलों में सड़क स्तर तक सटीक जानकारी दे सकता है।
मदद
जांच एजेंसियों को मिल रही मदद
इस तकनीक को मूल रूप से कानून लागू करने वाली एजेंसियों की मदद के लिए विकसित किया गया था और अभी भी यह सामान्य लोगों के लिए नहीं उपलब्ध है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में मियामी-डेड शेरिफ ऑफिस और लॉस एंजिल्स पुलिस विभाग जैसे संस्थान जांच में इसका उपयोग कर रहे हैं। जिन मामलों में केवल एक तस्वीर उपलब्ध होती है, वहां यह टूल तेजी से लोकेशन पहचानने में सहायक साबित हो सकता है।
खतरा
गलत इस्तेमाल का बढ़ता खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तकनीक आम लोगों तक पहुंच गई तो इसका दुरुपयोग भी हो सकता है। कोई भी व्यक्ति सोशल मीडिया से फोटो लेकर उसकी लोकेशन का पता लगाने की कोशिश कर सकता है, जिससे निजी जीवन और सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है। जियोस्पाई AI यह दिखाता है कि आज के दौर में प्राइवेसी सिर्फ जानकारी छिपाने से नहीं, बल्कि डाटा के विश्लेषण से भी जुड़ी हुई है।