अंटार्कटिका के ब्लड फॉल्स का 15 लाख साल पुराना राज खुला
एक सदी से भी ज्यादा समय के बाद वैज्ञानिकों ने आखिर इस राज का पता लगा लिया है कि अंटार्कटिका का 'ब्लड फॉल्स' इतना लाल क्यों दिखाई देता है।
दरअसल, टेलर ग्लेशियर के नीचे 15 लाख सालों से जमा लोहे से भरपूर खारा पानी, जब बर्फ के नीचे दबाव बदलता है तो छिपे हुए रास्तों से ऊपर की ओर धकेला जाता है।
जब यह पुराना खारा पानी हवा के संपर्क में आता है तो यह रासायनिक क्रिया करता है और इसका रंग गहरा लाल हो जाता है।
ग्लेशियर की सतह नीचे जाने से ज्यादा निकला पानी
टीम ने यह भी पाया कि 2018 में 'ब्लड फॉल्स' से बड़ी मात्रा में पानी का निकलना ग्लेशियर की सतह के लगभग 15mm नीचे जाने और कुछ समय के लिए उसकी गति धीमी होने से जुड़ा था।
सतह के इस नीचे जाने से नीचे का दबाव कम हो जाता है, जिससे वह पुराना लोहे वाला पानी आसानी से बाहर निकल पाता है।
उनका यह शोध यह समझने में अहम जानकारी देता है कि बर्फीले और जमे हुए इलाकों में तरल पानी कैसे चलता है।