पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन पर भावुक हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जताया गहरा दुख
क्या है खबर?
मशहूर पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ तीजन बाई के निधन से पूरा देश शोक में डूबा हुआ है। कला जगत की इस अपूरणीय क्षति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गहरा दुख व्यक्त किया है। नरेंद्र मोदी ने तीजन बाई को याद करते हुए सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक संदेश साझा किया है, जिसमें उन्होंने देश की इस महान कला-साधिका के लिए कुछ ऐसी बातें कही हैं, जो हर भारतीय के दिल को छू लेंगी।
श्रद्धांजलि
पूरी दुनिया में दिलाई लोक कला को पहचान- प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने दिग्गज गायिका को एक्स पर श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, 'मशहूर पंडवानी गायिका तीजन बाई जी के निधन से मुझे गहरा दुख हुआ है। उन्होंने अपने शानदार प्रदर्शनों के जरिए छत्तीसगढ़ की इस लोक कला को पूरी दुनिया में एक अनोखी पहचान दिलाई। उनका जाना कला और संस्कृति की दुनिया के लिए एक ऐसी क्षति है] जिसे कभी पूरा नहीं किया जा सकता। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।'
ट्विटर पोस्ट
प्रधानमंत्री ने जताया शोक
सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की इस लोक कला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में एक विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका जाना कला एवं संस्कृति जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और…
— Narendra Modi (@narendramodi) July 5, 2026
शोक
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी जताया दुख
पंडवानी कला की सबसे दिग्गज कलाकार तीजन बाई का 70 की उम्र में लंबी बीमारी के बाद रायपुर के एक अस्पताल में निधन हो गया। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा, "पद्म विभूषण और पद्मश्री से सम्मानित तीजन बाई जी का निधन हो गया है। उन्होंने पूरे देश और दुनिया में छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया था। हम उन्हें अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।"
लोकप्रियता
छत्तीसगढ़ की लोक कला को वैश्विक मंच पर दिलाई थी पहचान
तीजन बाई को पंडवानी कला का एक महान स्तंभ माना जाता था। पंडवानी छत्तीसगढ़ की एक पारंपरिक लोक कला है, जिसमें महाभारत की कहानियों को गाकर और अभिनय के जरिए सुनाया जाता है। अपने दमदार और जोशीले प्रदर्शनों के दम पर उन्होंने इस लोक परंपरा को दुनियाभर के दर्शकों तक पहुंचाया। कला के क्षेत्र में उनके इसी शानदार योगदान के लिए उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों पद्मश्री और पद्म विभूषण से भी नवाजा गया था।