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वैज्ञानिकों ने बनाया सूर्य के चुंबकीय क्षेत्र का 3D नक्शा, सौर विस्फोटों को समझना होगा आसान
वैज्ञानिकों ने बनाया सूर्य के चुंबकीय क्षेत्र का 3D नक्शा

वैज्ञानिकों ने बनाया सूर्य के चुंबकीय क्षेत्र का 3D नक्शा, सौर विस्फोटों को समझना होगा आसान

Oct 29, 2026
04:03 pm

क्या है खबर?

वैज्ञानिकों ने सूर्य के बाहरी हिस्से में मौजूद चुंबकीय क्षेत्र का पहली बार 3D नक्शा तैयार किया है। इसके लिए पहले से उपलब्ध दूरबीनों से मिले आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया। इस खोज से सूर्य पर होने वाले शक्तिशाली विस्फोटों को समझने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही, अंतरिक्ष में मौसम का पूर्वानुमान लगाने की तकनीक भी बेहतर हो सकती है। इस शोध के नतीजे 28 अक्टूबर, 2026 को एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में प्रकाशित हुए।

अध्ययन

सूर्य के कोरोना की चुंबकीय संरचना पर अध्ययन

सूर्य के सबसे बाहरी वातावरण को कोरोना कहा जाता है।

यहां बेहद गर्म प्लाज्मा मौजूद होता है और इसका चुंबकीय क्षेत्र सूर्य की गतिविधियों को प्रभावित करता है। वैज्ञानिक लंबे समय से इस हिस्से का अध्ययन कर रहे हैं, लेकिन चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और ताकत को 3D में समझना मुश्किल रहा है।

नए शोध में हवाई स्थित मौना लोआ सोलर ऑब्जर्वेटरी से मिले आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया, इससे सूर्य के बाहरी वातावरण को समझने में मदद मिलेगी।

उपकरण

2 उपकरणों से मिले आंकड़ों की मदद से तैयार हुआ नक्शा

अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की टीम ने कोरोनल मल्टी-चैनल पोलारिमीटर और इसके उन्नत वर्जन UCOMP से मिले आंकड़ों का विश्लेषण किया।

इसमें 14 अक्टूबर, 2016 और 1 जून, 2022 को दर्ज किए गए अवलोकन शामिल थे। वैज्ञानिकों ने IEQUD इनवर्जन नाम की गणितीय तकनीक का इस्तेमाल करके कोरोना से गुजरने वाली तरंगों की जानकारी का अध्ययन किया।

इससे चुंबकीय क्षेत्र की ताकत और उसकी 3D दिशा का अनुमान लगाया गया। इसके लिए किसी नए दूरबीन या उपकरण की जरूरत नहीं पड़ी।

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अन्य

अंतरिक्ष में आने वाले तूफानों का अनुमान लगाने में मिलेगी मदद

सूर्य से निकलने वाले शक्तिशाली विस्फोट अंतरिक्ष में बड़ी मात्रा में चुंबकीय प्लाज्मा छोड़ सकते हैं।

इन घटनाओं को कोरोनल मास इजेक्शन कहा जाता है। जब इनका रुख पृथ्वी की ओर होता है, तो भूचुंबकीय तूफान पैदा हो सकते हैं। इनसे सैटेलाइट, रेडियो संचार, नेविगेशन और बिजली व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

नई तकनीक अभी परीक्षण के दौर में है। शोधकर्ताओं ने अपना सॉफ्टवेयर और आंकड़े सार्वजनिक किए हैं, ताकि अन्य वैज्ञानिक भी इसका अध्ययन और सुधार कर सकें।

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