अंटार्कटिका के ग्लेशियर को तेजी से खिसका रहा पिघला पानी
वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि पूर्वी अंटार्कटिका में मौजूद लैंगहोवडे ग्लेशियर पहले से 20 फीसदी ज्यादा तेजी से खिसक रहा है।
इसकी वजह यह है कि पिघलती हुई बर्फ का पानी इसकी निचली सतह तक रिसकर पहुंच रहा है। यह पानी नीचे इकट्ठा होकर बर्फ पर दबाव बनाता है, जिससे बर्फ आसानी से फिसलने लगती है।
इसी कारण ग्लेशियर के पानी पर तैरते और जमीन से टिके हुए दोनों हिस्से अब रफ्तार पकड़ रहे हैं।
पिघले पानी से बढ़ी ग्लेशियर की रफ्तार
दिसंबर, 2021 से फरवरी, 2022 के दौरान शोधकर्ताओं ने इन बदलावों पर नजर रखने के लिए ग्लेशियर में गहराई तक खुदाई की।
उनके लगाए उपकरण ने देखा कि जब बहुत ज्यादा बर्फ पिघल रही थी और बारिश हो रही थी, खासकर जनवरी की एक तेज बारिश के बाद तो बर्फ की गति में अचानक काफी उछाल आया।
इसका सीधा मतलब है कि जैसे-जैसे अंटार्कटिका का तापमान बढ़ रहा है और मौसम की घटनाएं और तेज हो रही हैं, सतह पर जमा पिघला हुआ पानी ग्लेशियरों को और भी रफ्तार दे सकता है। इससे जलवायु परिवर्तन के असर से अंटार्कटिका के ग्लेशियरों की गति में और भी तेजी आ सकती है।