वैज्ञानिकों ने ग्रहों को बनाने वाले AGNs का लगाया पता
कोलोराडो बोल्डर यूनिवर्सिटी के एक शोधकर्ता सहित वैज्ञानिकों की टीम ने हाल ही में एक चौंकाने वाली खोज की है। उन्होंने पाया है कि सुपरमैसिव ब्लैक होल के आस-पास के बेहद चमकीले और अशांत इलाके, जिन्हें एक्टिव गैलेक्टिक न्यूक्लिआई (AGNs) कहते हैं, जो असल में ग्रहों के बड़े कारखाने हो सकते हैं।
उनके नए अध्ययन से पता चला है कि इन मुश्किल परिस्थितियों में लाखों ग्रहों का निर्माण हो सकता है। खास बात यह है कि ये AGNs इतने ज्यादा प्रकाशमान होते हैं कि इनकी चमक पूरी आकाशगंगा को भी फीका कर देती है।
कंप्यूटर सिमुलेशन से लगाया पता
कंप्यूटर सिमुलेशन की मदद से टीम ने यह भी पता लगाया है कि AGN की डिस्क में मौजूद धूल के कण आपस में जुड़कर और बढ़ते हुए विशाल 'डस्ट जायंट्स' का रूप ले सकते हैं। इनमें से कुछ ग्रह तो बृहस्पति (ज्यूपिटर) से भी बड़े हो सकते हैं। ये ग्रह अपनी जगह पर स्थिर रहते हैं, लेकिन धीरे-धीरे समय के साथ ब्लैक होल से दूर खिसकते चले जाते हैं।
शोधकर्ता भूपेंद्र मिश्रा ने बताया कि AGN डिस्क में नए तारों के चारों ओर की डिस्क के मुकाबले कहीं ज्यादा गैस मौजूद होती है।
यही वजह है कि यहां ग्रहों का बनना ज्यादा आसान हो जाता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य के शोध में इन छिपी हुई दुनियाओं को खोजने के लिए 'ग्रैविटेशनल लेंसिंग' तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है।