अब नहीं सड़ेंगे फल-सब्जियां, नई तकनीकें बदल रहीं भारत की सप्लाई चेन
भारत में ताजी उपज की सप्लाई चेन अब अपनी पुरानी कमियों को दूर करने के लिए नई तकनीक का सहारा ले रही है।
आज भी ज्यादातर फल और सब्जियां भीड़-भाड़ वाले थोक बाजारों में ही बिकती हैं। इन बाजारों में सुविधाओं की कमी और छोटे किसानों के कारण काफी दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। अब नई पोस्ट-हार्वेस्ट तकनीकें इन मुश्किलों को आसान बनाने लगी हैं।
तकनीक के उपयोग से कम हो रही बबार्दी
सॉर्टिंग सेंटर, रिपनिंग चैंबर और कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स में किए गए निवेश से बर्बादी कम हो रही है और उत्पादों की गुणवत्ता में भी सुधार आ रहा है।
कंप्यूटर विजन सिस्टम अब मैनुअल जांच की जगह ले रहे हैं, जिससे उत्पादों की ग्रेडिंग में ज्यादा एकरूपता आ रही है। इसके साथ ही, ट्रेसिबिलिटी (उत्पाद के स्रोत और सफर का पता लगाना) भी बड़ा बदलाव ला रही है। ग्राहक QR कोड स्कैन कर यह जान सकते हैं कि उनका खाना कहां से आया और उसकी सुरक्षा की जांच कैसे की गई। हालांकि, खेतों के स्तर पर यह तकनीक अभी भी ज्यादातर छोटे किसानों तक नहीं पहुंच पाई है। फसल निगरानी जैसे डिजिटल उपकरणों को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए बड़े निवेश, प्रशिक्षण और सरकार के मजबूत समर्थन की जरूरत होगी, तभी यह तकनीक सही मायने में सफल हो पाएगी।