जर्मन वैज्ञानिकों ने लेजर से धरती पर ही बनाया ब्लैक होल
जर्मनी के वैज्ञानिकों ने लेजर और एक खास तरह के ऑप्टिकल फाइबर का इस्तेमाल करके धरती पर ही ब्लैक होल जैसी स्थितियां तैयार की हैं।
इसका मतलब है कि उन्होंने धरती पर ही एक छोटा-सा 'इवेंट होराइजन' बना लिया है। पाडरबोर्न यूनिवर्सिटी के लोरेन्जो प्रोकोपियो के नेतृत्व में हुए इस प्रयोग से यह समझने में आसानी होगी कि ब्लैक होल अपनी ऊर्जा कैसे खोते हैं। इन नतीजों से ब्रह्मांड के कई बड़े रहस्यों से पर्दा उठने की उम्मीद है।
काम करने का तरीका समझने में मिलेगी मदद
टीम का मुख्य ध्यान हॉकिंग रेडिएशन पर रहा, जो स्टीफन हॉकिंग का एक सिद्धांत है। इस सिद्धांत के मुताबिक, ब्लैक होल धीरे-धीरे गर्मी छोड़ते हुए खत्म हो जाते हैं।
वैज्ञानिकों ने 'बैक-रिएक्शन' भी देखा, जिसका अर्थ है कि इस प्रक्रिया से ऊर्जा का नुकसान होता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये दोनों प्रभाव एक ही साधारण तंत्र से सामने आए, न कि उस जटिल प्रक्रिया से जैसा वैज्ञानिक पहले सोचा करते थे।
इस खोज से हम ब्लैक होल के असली काम करने के तरीके को समझने के और करीब आ गए हैं, भले ही हम अंतरिक्ष में इसे अभी तक होते हुए न देख पाए हों।