इंसान हर साल सांस के जरिए छोड़ते हैं 2 अरब टन CO2
क्या आप जानते हैं कि इंसान केवल जीने और सांस लेने भर से ही हर साल कुल मिलाकर 2 अरब मीट्रिक टन से भी ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) हवा में छोड़ देते हैं? CO2 के इस उछाल की मुख्य वजह बढ़ती आबादी है। 1985 से 2015 के बीच इंसानों द्वारा मेटाबॉलिक क्रिया से निकलने वाली CO2 में 74 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि कारों या फैक्ट्रियों से होने वाले प्रदूषण के उलट हमारी सांस से निकलने वाली CO2 प्रकृति के अपने कार्बन चक्र का ही हिस्सा है। यह जानकारी वैज्ञानिकों को जलवायु मॉडल को समझने का एक नया तरीका देती है।
आबादी की वजह से बढ़ी मेटाबॉलिक CO2
बाथ यूनिवर्सिटी के शोध में पता चला है कि मेटाबॉलिक CO2 में इस बढ़ोतरी का 60 फीसदी से ज्यादा हिस्सा केवल पृथ्वी पर बढ़ती आबादी की वजह से है।
शोधकर्ताओं ने अलग-अलग उम्र के लोगों के मापों का विश्लेषण किया और उन्हें दुनियाभर की आबादी और शरीर के वजन के डाटा के साथ मिलाकर यह हिसाब लगाया कि समय के साथ इंसानों की मेटाबॉलिक CO2 में कितना बदलाव आया है।
इंसानों की सांस से निकलने वाली CO2 असल में ग्लोबल वॉर्मिंग की मुख्य वजह नहीं बनती, लेकिन इन आंकड़ों को समझने से जलवायु परिवर्तन से निपटने की रणनीतियों को और बेहतर ढंग से तैयार किया जा सकता है।