बेकार प्लास्टिक बोतलें अब बनेंगी दमदार बैटरी का ईंधन
पेन स्टेट के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा तरीका ढूंढ निकाला है, जिससे पुरानी प्लास्टिक की बोतलों को लिथियम-आयन बैटरी के लिए सिंथेटिक ग्रेफाइट में बदला जा सकता है।
ये वही बोतलें, जिन्हें आप कोल्ड ड्रिंक पीने के बाद अक्सर फेंक देते हैं। यह खोज इसलिए अहम है क्योंकि ग्रेफाइट इलेक्ट्रिक गाड़ियों और मोबाइल फोन जैसे डिवाइसेज को चलाने के लिए बहुत जरूरी है।
दूसरी तरफ, प्लास्टिक कचरा आज दुनिया के लिए एक बड़ी समस्या बना हुई है। ऐसे में यह नई खोज पर्यावरण के साथ-साथ तकनीक को भी बहुत फायदा पहुंचा सकती है।
बिना मेटल कैटलिस्ट के ग्रेफाइट बनाया
इस टीम ने कतरन किए हुए पॉलीथीन टैरीपिथालेट (PET) प्लास्टिक को ग्राफीन ऑक्साइड के साथ मिलाकर गर्म किया।
इससे बिना किसी मेटल कैटलिस्ट (धातु उत्प्रेरक) का इस्तेमाल किए बेहतरीन गुणवत्ता का ग्रेफाइट बन गया। इस तकनीक से बने ग्रेफाइट क्रिस्टल तो प्रकृति में पाए जाने वाले क्रिस्टल से भी बड़े थे।
मुख्य शोधकर्ता शाक्षी शेखर ने बताया कि इस प्रक्रिया से वह पदार्थ जिसे ज्यादातर लोग कचरा मानते हैं, वह असल में ग्रेफाइट बनाने के लिए एक बेहद जरूरी संसाधन बन सकता है।
उन्होंने कहा कि यह तरीका प्लास्टिक की रीसाइक्लिंग को नई दिशा देगा और बेहतर बैटरी बनाने के रास्ते भी खोलेगा।