हॉली इम्प्लांट से किडनी मरीजों को मिलेगी डायलिसिस से मुक्ति
किडनी के मरीजों के लिए हॉली नाम की एक नई इम्प्लांटेबल आर्टिफिशियल किडनी पेश की गई है, जो हर साल अंतिम चरण वाले किडनी की बीमारी से जूझ रहे 2 लाख से ज्यादा भारतीयों का जीवन आसान बना सकती है। इसे अटलांटा, जॉर्जिया में स्थित मेडिकल डिवाइस कंपनी नेफ्रोडाइट के यूरोलॉजिस्ट और सह संस्थापक डॉ. निखिल शाह और डॉ. हिएप गुयेन ने बनाया है।
हॉली को सर्जरी के जरिए शरीर के अंदर लगाया जाता है। यह पेल्विक ब्लड वेसल्स से जुड़कर दिन-रात खून की गंदगी को फिल्टर करता रहता है।
इससे मरीजों को बार-बार अस्पताल जाने और दर्दनाक डायलिसिस की सुइयों की जरूरत खत्म हो जाती है।
अमेरिकी FDA से मिला ब्रेकथ्रू डिवाइस का दर्जा
अमेरिकी खाद्य और औषधि प्रशासन (FDA) ने 2025 में जानवरों पर हुए सफल परीक्षणों के बाद हॉली को 'ब्रेकथ्रू डिवाइस' का दर्जा दिया है।
अब जल्द ही इंसानों पर भी इसके ट्रायल शुरू होंगे। इसके मैन्युफैक्चरिंग हब कोच्चि, बेंगलुरु और मुंबई में पहले से ही स्थापित किए जा चुके हैं।
जिन लोगों को यह इम्प्लांट लगेगा उन्हें सिर्फ रात में पानी निकालने के लिए एक बेडसाइड मशीन से जुड़ना होगा। इसके अलावा, वे अपना सामान्य जीवन जी सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हॉली पूरे भारत में किडनी के इलाज को अब और भी सरल और सुलभ बना पाएगा।