वैज्ञानिकों ने लैब में बनाई प्लेसेंटा चिप, गर्भावस्था शोध में लाएगी क्रांति
मुंबई स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के महिलाओं के स्वास्थ्य पर अनुसंधान के लिए राष्ट्रीय संस्थान (NIRWoH) और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संगठन (IIT) बॉम्बे के शोधकर्ताओं ने मिलकर एक नई डिवाइस बनाई है, जिसे 'प्लेसेंटा-ऑन-चिप' नाम दिया गया है।
यह एक छोटी-सी चिप है, जो बिल्कुल असली इंसानी प्लेसेंटा की तरह काम करती है। लैब के अंदर यह चिप दिखाती है कि कैसे मां और बच्चे के बीच पोषक तत्व, हार्मोन और अपशिष्ट पदार्थों का लेन-देन होता है। इस शोध के नतीजे 'बायोफैब्रिकेशन' नाम के जर्नल में छपे हैं।
जानवरों पर होने वाले प्रयोगों की कम पड़ेगी जरूरत
यह चिप वैज्ञानिकों को गर्भावस्था से जुड़ी समस्याओं, जैसे जेस्टेशनल डायबिटीज, का सुरक्षित तरीके से अध्ययन करने का मौका देती है।
इससे जानवरों पर होने वाले प्रयोगों की जरूरत काफी हद तक कम हो जाएगी। इसे प्रयोगशालाओं में मौजूद आम उपकरणों के साथ आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है।
नतीजतन, गर्भवती महिलाओं के लिए दवाओं की टेस्टिंग पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद हो सकेगी। इस प्रोजेक्ट की अगुवाई अंशुुल भिड़े ने की, जबकि दीपक मोदी इसके सह लेखक रहे। यह प्रोजेक्ट हेल्थ टेक इनोवेशन के क्षेत्र में भारत की बढ़ती हुई शक्ति को दिखाता है।