MIT और एटलस ने प्लास्टिक कचरे से बनाई दमदार सामग्री
MIT और एटलस बिल्डिंग कंपोजिट्स ने प्लास्टिक कचरे को टिकाऊ निर्माण सामग्री में बदलने का एक शानदार तरीका खोजा है।
इस तरीके में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल होता है। सबसे पहले पुराने प्लास्टिक को पीसा और पिघलाया जाता है, फिर इसे अमेरिका में बने फाइबरग्लास के साथ मिलाया जाता है।
इस प्रक्रिया से एक बेहद मजबूत कंपोजिट बनता है, जिसका उपयोग मैसाचुसेट्स में 40 फीट लंबा पुल बनाने में भी किया जा चुका है।
इस तरीके में नहीं होता पानी का इस्तेमाल
खास बात यह है कि इस रीसाइक्लिंग तरीके में पानी का इस्तेमाल नहीं होता। इससे पारंपरिक रीसाइक्लिंग प्लांट्स को लगने वाली पानी की उपलब्धता, अनुमति और बुनियादी ढांचे की जरूरत खत्म हो जाती है, जो इसे पर्यावरण के लिए बहुत बेहतर बनाता है।
एटलस की योजना है कि वह ऐसी छोटी-छोटी इकाइयां खोलेगा, जहां रीसाइक्लिंग और उत्पादन दोनों काम वहीं स्थानीय फैक्ट्रियों में होंगे।
इसका मतलब है कि उन्हें दूर की बड़ी फैक्ट्रियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे सामान लाने-ले जाने में होने वाला प्रदूषण भी कम होगा और स्थानीय लोगों को ज्यादा रोजगार भी मिलेंगे। ये नए मटेरियल 1,814 किलोग्राम से ज्यादा वजन झेल सकते हैं, जो इन्हें काफी व्यावहारिक बनाता है।
इस तरह, कचरे को काम की चीजों में बदलकर MIT और एटलस एक साथ प्लास्टिक प्रदूषण और निर्माण दोनों की समस्याओं का हल निकाल रहे हैं।