स्टेम सेल थेरेपी से टाइप 1 डायबिटीज के इलाज में नई क्रांति
स्टेम सेल थेरेपी टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों के लिए एक नई उम्मीद जगा रही है। हाल ही में हुए एक ट्रायल में ज्यादातर मरीजों को लैब में तैयार किए गए स्टेम सेल्स से बने बीटा सेल्स दिए गए थे। 6 महीने के अंदर ही उन्हें इंसुलिन के इंजेक्शन से छुटकारा मिल गया। चीन में एक और मरीज को भी फायदा मिला। उसे अपनी ही वसा कोशिकाओं से बने लैब-ग्रोन बीटा सेल्स दिए गए थे और वह 12 महीने से ज्यादा समय तक बिना इंसुलिन के रहा।
जेनेटिक बदलाव और कैप्सूल पर रिसर्च
आज सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शरीर अक्सर इन ट्रांसप्लांट किए गए सेल्स पर हमला कर देता है। इस चुनौती से निपटने के लिए रिसर्चर्स जेनेटिक बदलाव और सुरक्षात्मक कैप्सूल जैसे उपाय ढूंढ रहे हैं। 2025 की एक स्टडी में पाया गया कि जीन-एडिटेड सेल्स बिना किसी अतिरिक्त दवा के शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली से बच सकते हैं। इन सेल्स की मदद से कई सप्ताह तक ब्लड शुगर को नियंत्रित रखा जा सका। अगर, ये तरक्की ऐसे ही जारी रही तो टाइप 1 डायबिटीज के इलाज में स्टेम सेल ट्रीटमेंट एक भरोसेमंद तरीका बन सकता है।