अल्जाइमर की दवा का दिमाग की अंदरूनी परतों पर नहीं दिखा असर, अध्ययन में खुलासा
जर्नल जामा में प्रकाशित एक नए ब्रेन ऑटोप्सी (पोस्टमार्टम) रिपोर्ट से यह समझने में मदद मिली है कि कभी अल्जाइमर लोकप्रिय दवा एडुकैनुमैब आखिर उम्मीदों पर खरी क्यों नहीं उतरी।
चिकित्सकों ने एक मरीज का अध्ययन किया, जिसे 4.5 साल में 30 खुराकें दी गई थीं। उन्हें पता चला कि यह दवा दिमाग की सिर्फ बाहरी परतों से एमाइलॉयड प्लेक्स हटा पाई, जबकि अंदरूनी और गहरी परतें अछूती रह गईं।
बड़े स्तर के अध्ययनों में दवा का कम दिखा असर
यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिलवेनिया के न्यूरोपैथोलॉजिस्ट एडवर्ड ली ने इसे प्लेक्स हटाने का दिमाग के आस-पास के ऊतक पर क्या असर होता है, इसे देखने का एक दुर्लभ अवसर बताया।
दिलचस्प बात यह है कि जिन क्षेत्रों में एमाइलॉयड कम था, वहां टाऊ टैंगल्स भी कम पाए गए और ऊतक को नुकसान होने की रफ्तार भी धीमी थी।
इस अध्ययन के सह वरिष्ठ लेखक, न्यूरोलॉजिस्ट और पेन अल्जाइमर डिजीज रिसर्च सेंटर के निदेशक डेविड वोल्क ने कहा कि यह मानव शरीर में मिले सबसे स्पष्ट सबूतों में से एक है कि ये दवाएं रोग की गति को कम कर सकती हैं। हालांकि, बड़े स्तर के अध्ययनों में अभी भी याददाश्त या सोचने की क्षमता में कोई खास सुधार नहीं दिखा है, इसलिए एक प्रभावी इलाज खोजना अभी भी बड़ी चुनौती है।