भारत का 2030 तक AI डाटा सेंटर्स पर करीब 2300 अरब रुपये खर्च करने का लक्ष्य
भारत अब डाटा सेंटर्स के लिए एक बड़ा और पसंदीदा ठिकाना बनता जा रहा है। सरकार ने 2030 तक यहां 25 अरब डॉलर (करीब 2,300 अरब रुपये) का निवेश जुटाने का लक्ष्य रखा है।
इसकी बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता इस्तेमाल है, डाटा को भारत में ही रखने से जुड़े नए नियम और सरकार की ओर से 2047 तक टैक्स में छूट जैसी कई सहूलियतें।
हालांकि, दुनिया के करीब 20 प्रतिशत डाटा ट्रैफिक का प्रबंधन करने के बावजूद वैश्विक डाटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर में भारत की हिस्सेदारी अभी भी सिर्फ 2 से 3 प्रतिशत के आस-पास ही है।
दिग्गज कंपनियां करीब 5,300 अरब रुपये लगाने को तैयार
पिछले 3 सालों में CPP इन्वेस्टमेंट्स जैसी कंपनियों ने कंट्रोलएस में 7,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है, जबकि एयरटेल की नेक्स्ट्रा डाटा ने एक अरब डॉलर (करीब 90 अरब रुपये) जुटाए हैं।
इस तरह भारतीय डाटा सेंटर्स में कुल 5 अरब डॉलर (करीब 450 अरब रुपये) से ज्यादा का निवेश आया है। अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसे बड़े तकनीकी दिग्गज भी अब इस मैदान में उतर गए हैं, जिन्होंने मिलकर 57 अरब डॉलर (करीब 5,300 अरब रुपये) के भारी-भरकम निवेश का ऐलान किया है।
देश की दिग्गज कंपनियां रिलायंस और अडाणी भी पीछे नहीं हैं। रिलायंस ने 2033 तक लगभग 110 अरब डॉलर (करीब 10,000 अरब रुपये) और अडाणी ने 2035 तक 100 अरब डॉलर (करीब 9,000 अरब रुपये) AI-रेडी डाटा सेंटर बनाने की योजना बनाई है। कम लागत और बेहतर नीतियों के कारण भारत तेजी से क्लाउड और AI से जुड़ी हर चीज के लिए एक पसंदीदा हब बनता जा रहा है।