भारत में डाटा सेंटर के लिए बनेगी नई नीति, बिजली खर्च को रोकने की तैयारी
क्या है खबर?
भारत सरकार देश में डाटा सेंटर बनाने और चलाने के लिए एक खास नीति तैयार कर रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि डाटा सेंटर की बढ़ती बिजली जरूरतों का बोझ आम लोगों पर न पड़े। नई दिल्ली में केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के एक कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि भारत बड़े डाटा सेंटर लगाने के लिए एक अच्छा स्थान बन सकता है।
तैयारी
आम उपभोक्ताओं की बिजली लागत बढ़ने से रोकने की तैयारी
प्रसाद ने कहा कि कुछ देशों में डाटा सेंटर की बढ़ती बिजली मांग के कारण आम उपभोक्ताओं को भी महंगी बिजली का सामना करना पड़ रहा है।
भारत सरकार ऐसी स्थिति से बचना चाहती है। हालांकि, मंत्री ने यह नहीं बताया कि नई नीति में कौन-कौन से प्रावधान होंगे और इसे कब लागू किया जाएगा। फिलहाल, भारत में डाटा सेंटर के लिए कोई अलग राष्ट्रीय नीति नहीं है।
इन्हें मौजूदा पर्यावरण और भवन निर्माण नियमों के तहत मंजूरी मिलती है।
सवाल
अमेजन और गूगल की परियोजनाओं पर उठे सवाल
भारत में अमेजन और गूगल के बड़े डाटा सेंटर प्रोजेक्ट्स को लेकर कुछ जगहों पर विरोध हुआ है।
मुंबई के पास अमेजन की परियोजना के आसपास रहने वाले लोगों ने बिजली, पानी की आपूर्ति और शोर को लेकर चिंता जताई है। वहीं, विशाखापत्तनम में पर्यावरण से जुड़े लोगों ने गूगल के 15 अरब डॉलर के प्रोजेक्ट पर सवाल उठाए हैं।
उनका कहना है कि इससे वन्यजीवों को नुकसान पहुंच सकता है।
अन्य
भारत में 200 अरब डॉलर के अवसर के रूप में देखा जा रहा क्षेत्र
अमेजन और गूगल ने प्रोजेक्ट्स को लेकर लगाए गए आरोपों से इनकार किया है।
कंपनियों का कहना है कि उनकी सुविधाओं में संसाधनों की खपत कम करने वाली आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी भारत को वैश्विक डाटा सेंटर का केंद्र बनाना चाहते हैं।
सरकार इस क्षेत्र में करीब 200 अरब डॉलर के अवसर देख रही है। नई नीति का उद्देश्य निवेश को बढ़ावा देने के साथ उपभोक्ताओं के हितों के बीच संतुलन बनाना है।