AI लॉन्च सिस्टम विकसित करना चाहता है IN-SPACe, अंतरिक्ष मिशनों में कैसे होगा फायदा?
क्या है खबर?
भारत के स्पेस सेक्टर में नई तकनीक को बढ़ावा देने के लिए इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर (IN-SPACe) ने बड़ा कदम उठाया है। एजेंसी ने सैटेलाइट, लॉन्च सिस्टम और अर्थ ऑब्जर्वेशन से जुड़े आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सॉल्यूशन तैयार करने के लिए स्टार्टअप्स को आमंत्रित किया है। खास बात यह है कि इसमें एज AI तकनीक पर जोर दिया गया है, जो सीधे स्पेसक्राफ्ट या सैटेलाइट पर चल सके और वहीं डाटा प्रोसेस कर सके।
प्रस्ताव
स्टार्टअप्स से मांगे गए प्रस्ताव
IN-SPACe की सीड फंड स्कीम के तहत "स्पेस सेक्टर में AI इंस्पायर्ड अपॉर्चुनिटीज" नाम से यह पहल शुरू की गई है। इसके तहत स्पेस टेक्नोलॉजी पर काम करने वाले स्टार्टअप्स और निजी संस्थाओं से प्रस्ताव मांगे गए हैं। इसमें ऑर्बिटल सिस्टम, ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर और स्पेस मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े AI प्रोजेक्ट शामिल होंगे। एजेंसी का कहना है कि दुनियाभर में स्पेस मिशनों को बेहतर बनाने के लिए AI और मशीन लर्निंग का तेजी से इस्तेमाल किया जा रहा है।
फायदा
अंतरिक्ष मिशन में कैसे मिलेगा फायदा?
AI तकनीक के इस्तेमाल से सैटेलाइट और अंतरिक्ष मिशनों को ज्यादा स्मार्ट और तेज बनाया जा सकेगा। एज AI की मदद से सैटेलाइट खुद ही डाटा प्रोसेस कर पाएंगे, जिससे ग्राउंड स्टेशन पर निर्भरता कम होगी। इससे रियल-टाइम इमेज प्रोसेसिंग, टकराव से बचाव और ऑटोनॉमस नेविगेशन जैसे काम आसान हो सकते हैं। इसके अलावा कृषि, मौसम और पृथ्वी से जुड़े डाटा के विश्लेषण में भी AI का इस्तेमाल बेहतर नतीजे दे सकता है।
मदद
स्टार्टअप्स को मिलेगी फंडिंग और मदद
इस पहल के तहत चुने गए स्टार्टअप्स को अपनी तकनीक विकसित करने के लिए सीड फंडिंग, मेंटरशिप और जरूरी तकनीकी सहायता दी जाएगी। उन्हें ISRO की सुविधाओं और अर्थ ऑब्जर्वेशन डाटा तक भी पहुंच मिल सकती है। IN-SPACe का कहना है कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य निजी स्पेस सेक्टर में AI आधारित इनोवेशन को तेज करना है, ताकि भारत भविष्य के स्पेस मिशनों और नई तकनीकों में मजबूत भूमिका निभा सके।