2100 तक पश्चिमी घाट बनेगा भारत का कार्बन सिंक- अध्ययन में किया यह दावा
एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि 2100 तक पश्चिमी घाट भारत के सबसे बड़े कार्बन सिंक में से एक बन सकते हैं।
इसकी वजह यह है कि यहां के पौधे ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड सोखेंगे। पुणे के भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के शोधकर्ताओं ने जलवायु मॉडल का इस्तेमाल करके यह पता लगाया है।
उनके मुताबिक, पश्चिमी घाट के साथ-साथ पश्चिमी हिमालय और पूर्वोत्तर भारत भी जलवायु परिवर्तन से मुकाबले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ये क्षेत्र भी बड़ी मात्रा में कार्बन सोखेंगे।
गर्मी पौधों की उत्पादकता पर डालती है असर
एक ओर जहां ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड और बारिश से पौधों की वृद्धि हो सकती है, वहीं दूसरी ओर बढ़ती गर्मी अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है।
शोधकर्ता स्मृति गुप्ता ने बताया, "गर्म सालों के दौरान ज्यादा तापमान पौधों की उत्पादकता को कम कर देता है क्योंकि इससे उनमें गर्मी और पानी की कमी का तनाव बढ़ जाता है।"
टीम ने इस बात पर भी जोर दिया कि लू और चरम मौसमी घटनाओं से पारिस्थितिकी तंत्र को खतरा हो सकता है। इसी वजह से भविष्य की योजना बनाने के लिए बेहतर जलवायु मॉडल की आवश्यकता है।