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नासा आर्टेमिस II मिशन में चारों अंतरिक्ष यात्रियों को रेडिएशन से कैसे सुरक्षित रखेगी?
अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की सुरक्षा में रहता है (तस्वीर: नासा)

नासा आर्टेमिस II मिशन में चारों अंतरिक्ष यात्रियों को रेडिएशन से कैसे सुरक्षित रखेगी?

Feb 02, 2026
07:00 pm

क्या है खबर?

नासा के आर्टेमिस II मिशन में जब चार अंतरिक्ष यात्री ओरियन अंतरिक्ष यान से चांद की ओर रवाना होंगे, तो उन्हें बेहद खतरनाक अंतरिक्ष माहौल का सामना करना पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की सुरक्षा में रहता है, लेकिन चांद की यात्रा में यह सुरक्षा नहीं मिलती है। जैसे ही क्रू लो-अर्थ ऑर्बिट से बाहर जाएगा, वे सीधे गहरे अंतरिक्ष के रेडिएशन के संपर्क में आ जाएंगे, जो मानव शरीर के लिए जोखिम भरा होता है।

खतरे

रेडिएशन से जुड़े बड़े खतरे

अंतरिक्ष में कॉस्मिक किरणें और अचानक आने वाले सोलर फ्लेयर मौजूद होते हैं, जो इंसानी कोशिकाओं और DNA को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे कैंसर और दूसरी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। आर्टेमिस II क्रू को पृथ्वी पर मिलने वाले रेडिएशन से लगभग 50 से 100 गुना ज्यादा रेडिएशन झेलना पड़ सकता है। यह जोखिम छोटा नहीं है, लेकिन मिशन की सफलता के लिए इसे ध्यान में रखकर योजना बनाई गई है।

वैन एलन बेल्ट

वैन एलन बेल्ट से गुजरना

चांद तक पहुंचने के लिए क्रू को वैन एलन बेल्ट से गुजरना होगा, जो पृथ्वी के चारों ओर मौजूद रेडिएशन के दो बड़े क्षेत्र हैं। अपोलो मिशन में इनसे तेजी से निकला गया था, लेकिन आर्टेमिस II मिशन में सिस्टम की जांच के लिए क्रू को हाई-अर्थ ऑर्बिट में ज्यादा समय बिताना होगा। इसका मतलब है कि अंतरिक्ष यात्रियों को इन बेल्ट्स को कई बार पार करना पड़ेगा, जिससे रेडिएशन एक्सपोजर बढ़ेगा।

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सुरक्षा

नासा की सुरक्षा तैयारियां

नासा ने ओरियन कैप्सूल को खास रेडिएशन शील्डिंग के साथ तैयार किया है, ताकि क्रू को ज्यादा सुरक्षा मिल सके। सोलर स्टॉर्म के समय अंतरिक्ष यात्री कैप्सूल के बीच वाले हिस्से को सुरक्षित शेल्टर की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा, खास वियरेबल सूट भी दिए जाएंगे जो शरीर के जरूरी अंगों की रक्षा करते हैं। नासा का मानना है कि 10 दिन का यह मिशन सुरक्षित सीमा के भीतर रहेगा।

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