NavIC सेटेलाइट सिस्टम में खराबी से कैसे भारत की सैन्य निगरानी हो रही प्रभावित?
क्या है खबर?
अंतरिक्ष में तैनात भारत के क्षेत्रीय नेविगेशन सिस्टम NavIC को बड़ा झटका लगा है। PTI की रिपोर्ट के अनुसार, 10 मार्च को IRNSS-1F सैटेलाइट में लगी आखिरी काम कर रही एटॉमिक घड़ी भी बंद हो गई। इसके बाद अब सिर्फ तीन सैटेलाइट ही पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग सेवाएं दे पा रहे हैं। इस खराबी के कारण पूरे सिस्टम की क्षमता और भरोसे पर असर पड़ा है, जिससे इसके इस्तेमाल को लेकर चिंता बढ़ गई है।
असर
कम सैटेलाइट से सिस्टम की सटीकता पर असर
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी नेविगेशन सिस्टम को सही तरीके से काम करने के लिए कम से कम चार सैटेलाइट जरूरी होते हैं, जिनमें एटॉमिक घड़ी ठीक से काम कर रही हो। IRNSS-1F सैटेलाइट की खराबी से अभी यह संख्या घटकर तीन रह गई है। इससे लोकेशन बताने, समय तय करने और नेविगेशन सेवाओं की सटीकता कम हो सकती है। इसका असर आम उपयोग के साथ-साथ सुरक्षा और रक्षा से जुड़े कामों पर भी पड़ सकता है।
असर
सिविल और सैन्य सिग्नल पर असर
पूर्व वैज्ञानिक अनन्या रे के अनुसार, NavIC दो तरह के सिग्नल पर काम करता है। एक ओपन सिग्नल होता है, जिसका उपयोग आम लोग करते हैं, और दूसरा सीमित व ज्यादा सटीक सिग्नल होता है, जो सेना के लिए होता है। यह सिग्नल सैन्य ऑपरेशन, मैपिंग और रणनीति बनाने में अहम भूमिका निभाता है। सिस्टम कमजोर होने पर इन कामों की सटीकता और भरोसे पर असर पड़ सकता है, जिससे सुरक्षा चिंताएं बढ़ जाती हैं।
वजह
तकनीकी समस्या और पुराना सिस्टम बना वजह
NavIC को भारत ने इसलिए विकसित किया था, ताकि दूसरे देशों के सिस्टम पर निर्भरता कम हो सके। यह IRNSS प्रोग्राम के तहत 2013 से 2018 के बीच लॉन्च किए गए सैटेलाइट पर आधारित है। लेकिन समय के साथ कई सैटेलाइट की एटॉमिक घड़ियां खराब हो रही हैं। ये घड़ियां बेहद सटीक समय देती हैं, जो सही नेविगेशन के लिए जरूरी होता है। इनके खराब होने से सिस्टम की कार्यक्षमता लगातार प्रभावित हो रही है।