नासा कैसे किफायती बनाना चाहती है अपना अगला आर्टेमिस मिशन?
क्या है खबर?
अंतरिक्ष एजेंसी नासा अपने आर्टेमिस चंद्र मिशन की बढ़ती लागत को कम करने के लिए नए विकल्पों पर विचार कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, एजेंसी बोइंग और लॉकहीड मार्टिन द्वारा पहले से बनाए गए रॉकेट कंपोनेंट का इस्तेमाल करने की योजना देख रही है। इसका मकसद मिशन को समय पर आगे बढ़ाना और खर्च को नियंत्रित रखना है। नासा पर इस समय अंतरिक्ष कार्यक्रमों के बड़े लक्ष्यों और सीमित बजट के बीच संतुलन बनाने का दबाव है।
योजना
चांद पर इंसानों को फिर भेजने की योजना
आर्टेमिस प्रोग्राम नासा की बड़ी योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य इंसानों को फिर से चांद पर भेजना और वहां लंबे समय तक मिशन चलाना है। हालांकि, इस कार्यक्रम की लागत लगातार बढ़ रही है। रॉकेट हार्डवेयर, टेस्टिंग और मिशन ऑपरेशन में खर्च उम्मीद से ज्यादा हो रहा है। इसी वजह से विशेषज्ञ और नीति निर्माता भी मिशन की कुल लागत को लेकर चिंता जता रहे हैं और बजट कम करने के उपायों पर चर्चा हो रही है।
फायदा
बोइंग और लॉकहीड के अनुभव का फायदा
नासा पहले से तैयार और टेस्ट किए गए रॉकेट पार्ट्स का इस्तेमाल करने पर विचार कर रही है। बोइंग और लॉकहीड मार्टिन जैसे बड़े एयरोस्पेस कॉन्ट्रैक्टर पहले भी स्पेस लॉन्च सिस्टम जैसे प्रोजेक्ट में नासा के साथ काम कर चुके हैं। ऐसे में उनके बनाए हुए सिस्टम और कंपोनेंट का उपयोग करने से समय और पैसा दोनों बच सकते हैं। हालांकि, नासा का कहना है कि किसी भी बदलाव से पहले सख्त सुरक्षा और विश्वसनीयता परीक्षण जरूर किए जाएंगे।
असर
भविष्य के चंद्र मिशनों पर पड़ेगा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसले भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए नई दिशा तय कर सकते हैं। पहले से मौजूद तकनीक का उपयोग करके मिशन को अधिक किफायती और सुरक्षित बनाया जा सकता है। नासा का लक्ष्य है कि चांद पर स्थायी मानव उपस्थिति की दिशा में काम जारी रहे। इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय और निजी कंपनियों के साथ साझेदारी करके अंतरिक्ष खोज को आगे बढ़ाया जाए।