गूगल के अधिकारी ने AI की चेतना पर चल रही बहस पर सवाल उठाए
गूगल में टेक्नोलॉजी और सोसाइटी के उपाध्यक्ष और पैराडाइम्स ऑफ इंटेलिजेंस टीम के मुखिया ब्लेज एगुएरा वाई आर्कास का मानना है कि अब हमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की चेतना पर चर्चा के तरीके को बदलने की जरूरत है।
AI सचमुच जागरूक है या नहीं इस बहस में पड़ने के बजाय, उनका सुझाव है कि हमें इस बात पर गौर करना चाहिए कि इंसान कई बार AI को जिंदा क्यों महसूस करते हैं। उनके मुताबिक, इसका कारण हमारी अपनी भावनाएं और रिश्ते हैं न कि AI का असल स्वभाव।
क्लाउड ओपस 4.6 ने 20 फीसदी तक सचेत माना
आर्कास का कहना है कि भले ही एडवांस AI आत्म-जागरूक लगें, लेकिन यह अहसास हमारे अंदर से आता है, न कि उनसे। उन्होंने एंथ्रोपिक के क्लाउड ओपस 4.6 का उदाहरण दिया, जिसने खुद को 15 से 20 फीसदी 'सचेत' बताया था।
इस बात से AI की नैतिकता और उनके भले से जुड़े कई बड़े सवाल उठते हैं। उनका कहना है कि अब हमें फिर से सोचना चाहिए कि क्या सोचने-समझने की शक्ति और नैतिक भावनाओं को केवल इंसानों जैसे दिमाग तक ही सीमित रखना चाहिए।