आधे से ज्यादा प्रवासी पक्षी गायब होने की कगार पर, शोध में खुलासा
एक नए वैश्विक अध्ययन में पता चला है कि आधे से ज्यादा प्रवासी पक्षियों की संख्या तेजी से कम हो रही है। स्मिथसोनियन की जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के नेशनल जू और कंजर्वेशन बायोलॉजी इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने दुनियाभर के पक्षी विशेषज्ञों के साथ मिलकर यह अध्ययन किया है।
इस शोध में बताया गया है कि करीब 300 प्रजातियां 'ग्लोबली थ्रेटेंड' यानि वैश्विक स्तर पर लुप्तप्राय मानी जा रही हैं। इन पक्षियों की आबादी घटने के पीछे उनके रहने की जगहें तबाह होना, जलवायु परिवर्तन, दूसरे इलाकों से आई आक्रामक प्रजातियां, कीटनाशकों का ज्यादा इस्तेमाल, बीमारियां और इमारतों या बिजली की लाइनों जैसे इंसानी इन्फ्रास्ट्रक्चर से उनका टकराना मुख्य कारण हैं।
मिलकर काम करने पर दिया जोर
ये प्रवासी पक्षी सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह नहीं जाते, बल्कि ये पूरे महाद्वीपों में पौधों का परागण करके और हानिकारक कीटों को कंट्रोल करके पर्यावरण में एक अहम भूमिका निभाते हैं।
शोध में यह भी बताया गया है कि अगर, हम इनके आवासों को बचाते हैं और इनकी गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखते हैं तो हालात सुधर सकते हैं।
पहले भी वॉटरफॉउल और रैप्टर्स जैसे पक्षियों की आबादी वापस लौट आई है। शोध के सह मुख्य लेखक पीटर मारा ने साफ कहा कि अब असली चुनौती यह है कि हम साझेदारियों, जरूरी संसाधनों, राजनीतिक इच्छाशक्ति और लोगों की भागीदारी को एक साथ लाएं, ताकि इन पक्षियों को उस बड़े पैमाने पर बचाया जा सके, जिसकी उन्हें जरूरत है। साफ संदेश यह है कि इन पक्षियों को बचाने के लिए अभी से पूरी दुनिया को मिलकर काम करना होगा।