जलवायु परिवर्तन से 10 फीसदी बढ़ गया साल्मोनेला का एंटीबायोटिक प्रतिरोध
एक नए वैश्विक अध्ययन से सामने आया है कि जलवायु परिवर्तन और साल्मोनेला बैक्टीरिया के एंटीबायोटिक प्रतिरोध के बीच गहरा रिश्ता है। इस अध्ययन में पता चला कि 1940 से 2023 के बीच ऐसे प्रतिरोधक जीनों में 10 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसके लिए शोधकर्ताओं ने 139 देशों के 4.8 लाख से ज्यादा नमूनों की जांच की।
उन्होंने पाया कि बढ़ता तापमान और बारिश के बदलते तौर-तरीकों का इन प्रतिरोधक जीनों की संख्या से सीधा संबंध है। ये चीजें इन बैक्टीरिया को न सिर्फ जिंदा रहने में मदद करती हैं, बल्कि इन्हें तेजी से फैलने का मौका भी देती हैं।
एंटीबायोटिक का अत्यधिक उपयोग मुख्य वजह
अभी भी एंटीबायोटिक का बहुत ज्यादा इस्तेमाल ही दवाओं के बेअसर होने की सबसे बड़ी वजह है, लेकिन जलवायु परिवर्तन इस समस्या को और भी तेजी से बढ़ा रहा है। खासतौर पर दक्षिण एशिया, अफ्रीका और मध्य-पूर्व जैसे इलाकों में इसका असर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।
अच्छी खबर यह है कि अगर, दुनिया के देश कार्बन उत्सर्जन घटाएं और एंटीबायोटिक का इस्तेमाल समझदारी से करें तो साल 2100 तक इस प्रतिरोध में लगभग 25 फीसदी तक की कमी आ सकती है।
अध्ययन बताता है कि इस चुनौती से निपटने के लिए सबको मिलकर काम करने की जरूरत है। इसमें जलवायु परिवर्तन पर बेहतर कार्रवाई, एंटीबायोटिक का सही इस्तेमाल और अस्पतालों से लेकर खेती-किसानी तक हर जगह कड़ी निगरानी शामिल है।