पैलियोग्राफिकम AI टूल खोलेगा 3,000 साल पुराने इतिहास के राज
जर्मनी के शोधकर्ताओं ने 'पैलियोग्राफिकम' नाम का एक नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल बनाया है।
कीलाकार लिपि में लिखी प्राचीन मिट्टी की पटि्टयों को पढ़ने के तरीके को बदल रहा है, जिससे अनातोलिया पर कभी प्रभुत्व रखने वाली हित्ती सभ्यता के अनगिनत भूले हुए रहस्यों को उजागर करने की संभावना है।
पहले ये मिट्टी की पट्टियां अक्सर टूटी-फूटी मिलती थीं और इन्हें समझने में कई दिन लग जाते थे, लेकिन अब यह AI कुछ ही मिनटों में हजारों तस्वीरों को स्कैन कर लेता है और बारीक से बारीक जानकारी भी पहचान लेता है। इससे 3000 साल से भी ज्यादा पुरानी, गुमशुदा कहानियों को फिर से जोड़ने में शोधकर्ताओं को नई राह मिली है।
लेखकों की लिखावट पहचानना
टेक्निकल यूनिवर्सिटी डॉर्टमुंड की मदद से एक बड़े रिसर्च प्रोजेक्ट के हिस्से के तौर पर पैलियोग्राफिकम को बनाया गया है। अब शोधकर्ता इसे इस तरह प्रशिक्षित कर रहे हैं, जिससे यह अलग-अलग लेखकों की लिखावट को पहचान सके।
इस नई तकनीक से यह समझने में मदद मिलेगी कि हित्ती सभ्यता में लेखन शैली किस तरह विकसित हुई और अलग-अलग लेखकों के करियर में क्या-क्या बदलाव आए।
विशेषज्ञ इस टूल को एक 'गेम-चेंजर' बता रहे हैं, क्योंकि यह शोध को तेजी देता है और पुराने अतीत को समझने के लिए नए दरवाजे खोलता है।