गगनयान मिशन में हो सकती है देरी, क्या है वजह?
क्या है खबर?
भारत के ऐतिहासिक गगनयान मिशन में देरी हो सकती है। पहली मानवरहित परीक्षण उड़ान फरवरी में निर्धारित थी, लेकिन तैयारियों में थोड़ी देरी हो सकती है। इस मिशन का उद्देश्य मानव अंतरिक्ष यात्रियों की उड़ान से पहले सिस्टम्स का परीक्षण करना है। इस देरी के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को ग्राउंड स्टेशन के उपयोग की मंजूरी नहीं मिलने के अलावा PSLV-C62 मिशन के असफल लॉन्च को माना जा रहा है।
वजह
हवाई से वापस लिया आवेदन
ISRO ने हवाई में एक ग्राउंड स्टेशन के उपयोग के लिए आवेदन किया था। यह गगनयान के प्रारंभिक कक्षा संचालन में सहायता प्रदान करेगा। आवेदन 9 जनवरी को FCC के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। 3 दिन बाद 12 जनवरी को आवेदन वापस ले लिया गया। इस वापसी से मिशन में संभावित देरी की अटकलें लगने लगीं। यह वापसी PSLV-C62 रॉकेट के असफल प्रक्षेपण के साथ हुई। रॉकेट के उड़ान के दौरान विफल होने से 16 उपग्रह नष्ट हो गए।
मिशन
क्या है मिशन?
गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है। यह 3 अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में ले जाएगा। मानवयुक्त यह मिशन अंतरिक्ष में लगभग 3 दिनों तक चलेगा। पहली मानवरहित उड़ान G1 सभी प्रणालियों का परीक्षण करेगी। इसमें व्योमत्रा नामक एक मानवरूपी रोबोट को परीक्षण यात्री के रूप में शामिल किया जाएगा। इसमें ISRO के मानव-योग्य प्रक्षेपण यान MK3 का उपयोग किया जाएगा। यह रॉकेट हाल ही में विफल हुए PSLV से अलग है।
फायदा
गगनयान मिशन का होगा यह फायदा
गगनयान मिशन भारत की अंतरिक्ष संबंधी महत्वाकांक्षाओं के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इस मिशन अंतरिक्ष कक्षा में मनुष्यों को सुरक्षित रूप से भेजने की भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी की क्षमता को प्रदर्शित करेगा। यह मिशन वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है। व्योमित्र के सेंसर भविष्य के अंतरिक्ष यात्रियों के लिए पर्यावरणीय परिस्थितियों का परीक्षण करेंगे। इस मिशन की सफलता से भारत उन देशों में शामिल हो जाएगा, जो मानव अंतरिक्ष उड़ान में सक्षम हैं।