बेपिरोवायरसिन ने जगाई हेपेटाइटिस B के उपचार की उम्मीद
स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ी कामयाबी मिली है। बेपिरोवायरसिन नाम की एक नई प्रायोगिक दवा ने क्रोनिक हेपेटाइटिस B के इलाज के लिए बड़ी उम्मीद जगाई है। 2 अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों से पता चला है कि जिन मरीजों को यह दवा दी गई, उनमें से करीब 5 में से एक मरीज के शरीर में दवा इंजेक्ट करने के 6 महीने बाद तक वायरस का कोई निशान नहीं मिला।
हेपेटाइटिस B की दवाओं के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है। यह बीमारी दुनियाभर में 25 करोड़ से ज्यादा लोगों को प्रभावित करती है और गंभीर लीवर की बीमारी का कारण बन सकती है, इसलिए यह एक बहुत ही उम्मीद जगाने वाला कदम है।
FDA की मंजूरी का इंतजार
बेपिरोवायरसिन वायरस के जेनेटिक मटेरियल को रोककर और शरीर की इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाकर काम करती है। अध्ययन में शामिल लोगों को 6 महीने तक हफ्ते में एक इंजेक्शन और साथ में सामान्य एंटीवायरल गोलियां दी गईं।
इसके साइड इफेक्ट्स में इंजेक्शन वाली जगह पर हल्की लालिमा या दर्द और लीवर एंजाइम में अस्थायी बढ़ोतरी देखी गई। US फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने बेपिरोवायरसिन को समीक्षा के लिए फास्ट ट्रैक पर डाल दिया है, जिसका फैसला अक्टूबर तक आने की उम्मीद है। यह देखने के लिए और रिसर्च की जा रही है कि ये नतीजे कितने लंबे समय तक टिकते हैं, लेकिन अभी तक के संकेत काफी सकारात्मक हैं।