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एलन मस्क की न्यूरालिंक पहली बार इंसान में 'ब्लाइंडसाइट' चिप लगाने के लिए तैयार
न्यूरालिंक पहली बार इंसान में चिप लगाने के लिए तैयार

एलन मस्क की न्यूरालिंक पहली बार इंसान में 'ब्लाइंडसाइट' चिप लगाने के लिए तैयार

Jan 29, 2026
03:01 pm

क्या है खबर?

एलन मस्क की ब्रेन चिप बनाने वाली कंपनी न्यूरालिंक अपने पहले मानव प्रत्यारोपण के लिए अब पूरी तरह तैयार है। मस्क ने कहा है कि न्यूरालिंक द्वारा डिजाइन की गई चिप 'ब्लाइंडसाइट' को रेगुलेटरी मंजूरी मिलने के बाद किसी इंसानी मरीज में इम्प्लांट किया जाएगा। यह चिप पूरी तरह से अंधे लोगों की मदद के लिए बनाई गई है और उन्हें दोबारा देखने का अनुभव देने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

ट्रायल

क्लिनिकल ट्रायल में इतने लोग हुए शामिल

अब तक न्यूरालिंक के ब्रेन-इम्प्लांट क्लिनिकल ट्रायल में दुनिया भर से 21 लोगों को शामिल किया जा चुका है। यह संख्या सितंबर, 2025 में सामने आए आंकड़े से काफ़ी ज्यादा है, जब कंपनी ने बताया था कि 12 लोग उसके चिप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये सभी पार्टिसिपेंट्स न्यूरालिंक के इंसानी ट्रायल प्रोग्राम का हिस्सा हैं, जहां ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस की सेफ्टी, परफॉर्मेंस और इस्तेमाल को लगातार टेस्ट किया जा रहा है।

काम

ब्लाइंडसाइट चिप कैसे करेगी काम?

मस्क के मुताबिक, ब्लाइंडसाइट चिप का मकसद तुरंत पूरी और साफ नजर लौटाना नहीं है। शुरुआत में मरीज को सीमित और कम डिटेल वाली विजन मिलेगी। जैसे-जैसे दिमाग नई जानकारी के साथ एडजस्ट करेगा, देखने की क्वालिटी धीरे-धीरे बेहतर होती जाएगी। यह चिप सीधे दिमाग को विजुअल सिग्नल भेजती है, जिससे उन लोगों को भी फायदा मिल सकता है जिनकी आंखें पूरी तरह काम करना बंद कर चुकी हैं।

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टेक्नोलॉजी

दिमाग से जुड़ने वाली टेक्नोलॉजी पर न्यूरालिंक का काम

ब्लाइंडसाइट न्यूरालिंक के बड़े मिशन का हिस्सा है, जिसमें दिमाग से सीधे जुड़ने वाले इम्प्लांट बनाए जा रहे हैं। कंपनी पहले ही कुछ मरीजों पर ब्रेन इम्प्लांट टेस्ट कर चुकी है, खासतौर पर ऐसे लोग जो लकवे से पीड़ित हैं और कंप्यूटर से इंटरैक्ट नहीं कर पाते। अगर नजर से जुड़ा यह प्रयोग सफल होता है, तो यह न्यूरालिंक की अब तक की सबसे बड़ी मेडिकल उपलब्धियों में से एक हो सकता है।

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योजनाएं

भविष्य की योजनाएं और नई संभावनाएं

मस्क ने बताया कि न्यूरालिंक एक और एडवांस्ड चिप पर भी काम कर रही है, जिसकी क्षमता मौजूदा वर्जन से तीन गुना ज्यादा होगी और इसके 2026 के अंत तक तैयार होने की उम्मीद है। इसके साथ ही, नया सर्जिकल रोबोट पहले से कहीं तेज होगा, जिससे इम्प्लांट प्रक्रिया आसान बनेगी। मस्क का दावा है कि भविष्य में यह तकनीक इंसानों को इंफ्रारेड और अल्ट्रावॉयलेट जैसी चीजें देखने में भी सक्षम बना सकती है।

ट्विटर पोस्ट

यहां देखें पोस्ट

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