क्लेयर पारफिट स्पेस टॉयलेट सफाई के काम से मंगल मिशन तक कैसे पहुंची?
यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) में मंगल अन्वेषण अध्ययन प्रमुख क्लेयर पारफिट एक ऐसी टीम का नेतृत्व कर रही हैं, जो मंगल ग्रह पर भविष्य में होने वाले इंसानी और रोबोटिक अभियानों की योजना बना रही है।
उनकी यह यात्रा 2001 से शुरू होती है, जब लीसेस्टर के नेशनल स्पेस सेंटर के उद्घाटन से पहले वे वहां स्पेस टॉयलेट साफ करने का काम करती थीं।
वे 14 साल की उम्र थी, जब नासा में आवेदन करने के बावजूद उन्हें नौकरी नहीं मिली। इसके बाद उन्हें इस सेंटर में यह मौका मिला और उन्होंने 2001 में इसके बड़े उद्घाटन की तैयारियों में पूरा सहयोग दिया।
एक्सोमार्स रोवर प्रोजेक्ट में दिया योगदान
नेशनल स्पेस सेंटर में मिले व्यावहारिक अनुभव और अपने विज्ञान शिक्षकों के भरपूर सहयोग से पारफिट ने भौतिकी की पढ़ाई की।
उन्होंने स्पेसक्राफ्ट पावर सिस्टम्स इंजीनियरिंग में PHD भी हासिल की। उन्होंने एक्सोमार्स रोवर जैसे कई अहम प्रोजेक्ट्स में अपना योगदान दिया है, जिसे 2028 में लॉन्च किया जाएगा।
अब वे मंगल अभियान की योजना बनाने का काम देख रही हैं और सुनिश्चित करती हैं कि भविष्य के मिशन ग्रह को नुकसान न पहुंचाएं और उनका वैज्ञानिक प्रभाव लंबे समय तक बना रहे।