चीन और भारत के AI में पिछड़ने की वजह आई सामने
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में आगे निकलना सिर्फ अच्छी तकनीक या ढेर सारे पैसों से नहीं होता, बल्कि इसके लिए तेज दिमागों की भी जरूरत पड़ती है।
मैक्रोपोलों की ताजा रिपोर्ट बताती है कि चीन दुनिया के 38 फीसदी शीर्ष AI शोधकर्ता तैयार करता है। हालांकि, उन्हें अपने देश में रोककर रख पाना उसके लिए मुश्किल होता है क्योंकि इनमें से ज्यादातर अमेरिका में जाकर काम करने लगते हैं।
रिपोर्ट साफ कहती है कि अगर, कोई देश AI के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहता है तो उसे अपनी प्रतिभाओं को देश में ही रोकना होगा।
भारत खो देता है 80 फीसदी शोधकर्ता
चीन के बाद भारत का नंबर आता है, जो दुनिया के शीर्ष AI शोधकर्ताओं में 10 फीसदी का योगदान देता है, लेकिन भारत में प्रशिक्षण पाने वाले इनमें से सिर्फ 20 फीसदी शोधकर्ता ही देश में रुक पाते हैं। बाकी के 80 फीसदी बेहतर मौकों की तलाश में अमेरिका चले जाते हैं।
वैश्विक AI पॉलिसी सलाहकार केली फोर्ब्स का कहना है कि दोनों देशों को अपने यहां बेहतर वेतन और अच्छे इंफ्रास्ट्रक्चर वाला मजबूत इकोसिस्टम बनाना होगा। ऐसा करने से ये देश अपने होनहार दिमागों को अपने पास रोक पाएंगे।