स्टारलिंक पर मस्क के आरोप को केंद्र सरकार ने किया खारिज, कहा- भारत का नियम निष्पक्ष
क्या है खबर?
केंद्र सरकार ने एलन मस्क के उस आरोप को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत में स्टारलिंक को कुछ अमीर लोग रोक रहे हैं। संचार मंत्रालय ने गुरुवार को मस्क के बयान को बेबुनियाद और गलत बताया और कहा है कि इस व्यवस्था को गलत या पक्षपाती बताना सही नहीं है। मंत्रालय ने कहा कि भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन समेत सभी टेलीकॉम सेवाओं के लिए निष्पक्ष और बिना भेदभाव वाला नियम बनाया गया है।
बयान
मस्क ने क्या कहा था?
मस्क ने बुधवार को एक पोस्ट में कहा था कि कुछ अमीर लोग अपनी कंपनियों की एकाधिकार वाली पकड़ बनाए रखने के लिए स्टारलिंक को भारत में आने से रोक रहे हैं।
उन्होंने लिखा, "बदकिस्मती से, कुछ अमीर लोग भारतीय लोगों पर अपनी मोनोपॉली वाली पकड़ बनाए रखने के लिए हमें ब्लॉक कर रहे हैं। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वे कौन हैं... यह भारत के लोगों के खिलाफ एक जुर्म है।"
हालांकि, उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया।
ट्विटर पोस्ट
यहां देखें मस्क का पोस्ट
Unfortunately, we are being blocked by certain oligarchs in order to maintain their monopolistic chokehold on the Indian people. You can guess who they are …
— Elon Musk (@elonmusk) October 7, 2026
This is a crime against the people of India! https://t.co/t3YONgpcm7
लाइसेंस
3 कंपनियों को मिला लाइसेंस
संचार मंत्रालय ने कहा कि भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवा देने के लिए 3 कंपनियों को टेलीकॉम लाइसेंस दिए गए हैं।
इनमें स्टारलिंक के अलावा यूटेलसैट वनवेब और जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस शामिल हैं। मंत्रालय के मुताबिक, तीनों कंपनियों को सेवा शुरू करने से पहले सुरक्षा से जुड़ी शर्तों को पूरा करना होगा।
अभी तीनों लाइसेंसधारी कंपनियों का सुरक्षा आकलन चल रहा है और प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे स्पेक्ट्रम आवंटन के अगले चरण में जा सकेंगी।
मंजूरी
सेवा शुरू करने से पहले मंजूरी जरूरी
स्टारलिंक लो-अर्थ ऑर्बिट में मौजूद सैटेलाइट के जरिए ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवा देती है, जिससे दूरदराज के इलाकों में भी कनेक्टिविटी पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
भारत में सेवा शुरू करने के लिए कंपनी को स्पेक्ट्रम आवंटन और सुरक्षा मंजूरी के साथ कुछ दूसरी नियामकीय मंजूरियां भी लेनी होंगी। इनमें विदेशी निवेश से जुड़ी मंजूरी भी शामिल है।
सरकार के मुताबिक, इन प्रक्रियाओं का सामना बाकी लाइसेंसधारी कंपनियां भी कर रही हैं और नियम सभी के लिए समान हैं।