सेलोजेन थेरेप्यूटिक्स विकसित की कैंसर की दोबारा वापसी रोकने वाली थेरेपी
नोएडा की सेलोजेन थेरेप्यूटिक्स ने कैंसर को दोबारा होने से रोकने के लिए एक आधुनिक (काइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर) CAR-T सेल थेरेपी विकसित की है। यह इलाज मरीज की अपनी रोग प्रतिरोधक कोशिकाओं को फिर से तैयार करता है, ताकि वे कैंसर की पहचान कर उसे खत्म कर सकें।
साथ ही, यह शरीर को उस खतरे को याद रखने की क्षमता देता है, जिससे कैंसर के दोबारा होने पर रोग प्रतिरोधक प्रणाली उसे तुरंत पहचान कर उस पर हमला कर सके। यह ठीक उसी तरह काम करता है, जैसे टीके हमारे शरीर को बीमारियों से लड़ने के लिए तैयार करते हैं।
थेरेपी को मिला भारत में पेटेंट
इस नई थेरेपी को भारत में पेटेंट मिल चुका है, जबकि अमेरिका में भी एक अस्थायी पेटेंट हासिल हुआ है। अब यह क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज-वेल्लोर में ल्यूकेमिया और लिम्फोमा के मरीजों पर पहले चरण के इंसानी परीक्षणों के लिए तैयार है।
फिलहाल, भारत में CAR-T इलाज का खर्च 20 से 40 लाख रुपये तक आता है, जो आम लोगों की पहुंच से बाहर है। इसी समस्या को देखते हुए सेलोजेन 'ऑफ-द-शेल्फ' वर्जन पर काम कर रही है। इसके अलावा, कंपनी 'इन-विवो' CAR-T थेरेपी भी बना रही है, जिससे इस इलाज की लागत लगभग 8 लाख रुपये तक कम हो सकती है।
इस विधि में मरीज के शरीर को ही इन शक्तिशाली कोशिकाओं को बनाने के लिए प्रेरित किया जाता है। वे ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर जैसे गंभीर बीमारी के लिए भी ऐसे ही इलाज तैयार कर रहे हैं।