औले स्पेस ने ऑटोनॉमस सैटेलाइट रेस्क्यू तकनीक का किया टेस्ट, अंतरिक्ष से हटाएगी कचरा
बेंगलुरु की स्टार्टअप औले स्पेस भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की रेंडेवू सिमुलेशन लैब में अपनी ऑटोनॉमस सैटेलाइट रेस्क्यू तकनीक का टेस्ट करने वाली पहली निजी कंपनी बन गई है।
इस सफलता के साथ उनके सिस्टम ने TRL 6 का अहम पड़ाव पार कर लिया है। यह दिखाता है कि उनका सिस्टम अंतरिक्ष में सैटेलाइट्स को अपने आप ढूंढने, उनके पास पहुंचने और उनसे जुड़ने (डॉक करने) जैसे मुश्किल काम आसानी से कर सकता है।
अब ऑर्बिटल वैलिडेशन की तैयारी
जय पांचाल, निथ्या गिरि और हृषित तंबी ने मिलकर 'औले स्पेस' की शुरुआत की है। यह कंपनी ऐसे रोबोटिक स्पेसक्राफ्ट बना रही है जो 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी के चारों ओर घूम रहे खराब हो चुके या काम न कर रहे सैटेलाइट्स को ठीक कर सकते हैं या उन्हें हटा सकते हैं।
कंप्यूटर विजन और स्मार्ट नेविगेशन का इस्तेमाल करते हुए उनकी यह तकनीक सैटेलाइट्स की उम्र बढ़ा सकती है और अंतरिक्ष में बढ़ रहे कचरे को भी कम कर सकती है।
20 लाख डॉलर (करीब 19 करोड़ रुपये) की प्री-सीड फंडिंग मिलने के बाद अब टीम 'ऑर्बिटल वैलिडेशन' की तैयारी में जुट गई है। यह कदम भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को दुनिया के नक्शे पर लाने में अहम भूमिका निभाएगा।