एस्ट्रोबेस ने किया स्पेस-X जैसे स्वदेशी रॉकेट इंजन परीक्षण
बेंगलुरु की स्टार्टअप कंपनी एस्ट्रोबेस स्पेस टेक्नोलॉजीज ने भारत के पहले 'फुल-फ्लो स्टेज्ड कम्बशन' रॉकेट इंजन का सफल परीक्षण किया है।
यह एक बेहद एडवांस डिजाइन है, जिसका इस्तेमाल अब तक सिर्फ स्पेस-X के रैप्टर इंजन में ही हुआ था। यह परीक्षण कंपनी के आंध्र प्रदेश स्थित केंद्र में हुआ और इस इंजन के मुख्य पुर्जों को भारत में ही डिजाइन करके 3D प्रिंट किया गया है।
एस्ट्रोबेस को मिला IN-SPACe का समर्थन
यह मीथेन से चलने वाला इंजन 80 टन तक वजन उठा सकता है। इसे 50 से ज्यादा बार इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया है, जिससे रॉकेट्स का दोबारा उपयोग करना बहुत आसान बनेगा।
एस्ट्रोबेस की शुरुआत 2024 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व वैज्ञानिक देवकुमार थम्मीसेट्टी और उद्यमी नीरज खंडेलावल ने मिलकर की थी।
भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) के समर्थन और 25 करोड़ रुपये की फंडिंग मिलने के बाद उनका लक्ष्य भारत को सैटेलाइट के मामले में अमेरिका जैसे देशों से फासला कम करना है। फिलहाल अमेरिका के पास 13,000 से ज्यादा सैटेलाइट हैं, जबकि भारत के पास अभी सिर्फ 55 हैं। वे 2028 तक अपना पहला ऑर्बिटल लॉन्च करने की योजना बना रहे हैं।