वन्यजीवों पर नजर रखने और जलवायु डाटा विश्लेषण में कमाल कर रहा AI
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर्यावरण समूहों के लिए तेजी से एक अहम टूल बन रहा है। यह वन्यजीवों पर नजर रखने और जलवायु डाटा का विश्लेषण करने जैसे कई कामों में उनका साथ दे रहा है।
कंजर्वेशन इंटरनेशनल कंबोडिया में AI का इस्तेमाल करके जंगल की आग की रियल-टाइम चेतावनी भेजता है।
इससे संरक्षण का काम ज्यादा तेजी और समझदारी से हो पाता है, लेकिन इसमें एक दिक्कत भी है। इस सारी तकनीक को चलाने के लिए बड़े-बड़े डाटा सेंटर्स में ज्यादा बिजली और पानी की जरूरत पड़ती है, जो हमारे ग्रह के लिए ठीक नहीं है।
जानवरों के सर्वे में आती है तेजी
चीजों को टिकाऊ बनाए रखने के लिए केन्या में 'सेव द एलिफेंट्स' जैसे संगठन AI का इस्तेमाल करते हैं। इससे जानवरों के सर्वे तेजी से होते हैं और इंसानों का काम भी कम हो जाता है।
फिर भी विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर, यही हाल रहा तो 2030 तक डाटा सेंटर अपनी ऊर्जा और पानी की खपत दोगुनी कर सकते हैं।
यही वजह है कि 'द नेचर कंजरवेंसी' स्थानीय AI प्रोसेसिंग का परीक्षण कर रहा है। उनका मकसद है कि स्मार्ट तकनीक के सारे फायदे मिलें, लेकिन पर्यावरण पर कोई अतिरिक्त बोझ न पड़े।