भारतीय GCCs तेजी से तैयार कर रहे पेटेंट, लेकिन अमेरिका आ रहा रास
डैम्लर ट्रक, एप्सिलॉन और किम्बर्ली-क्लार्क जैसी बड़ी कंपनियों के अधिकारियों का मानना है कि उनके भारतीय ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से नए विचार और पेटेंट तेजी से तैयार हो रहे हैं।
उनका कहना है कि ऑटोमेशन के चलते टीमें रोजाना के मामूली कामों से हटकर ज्यादा चुनौतीपूर्ण कामों पर ध्यान दे पा रही हैं।
डैम्लर ट्रक के राधाकृष्णन कोडक्कल ने कहा कि भारत के GCCs द्वारा बनाए गए IP, पेटेंट और व्यापार रहस्य की संख्या पहले से ही बढ़ रही है और AI इस काम को और गति देगा।
पेटेंट फाइलिंग में पीछे भारतीय GCCs
पिछले वित्त वर्ष में भारत के GCCs ने 98.4 अरब डॉलर (करीब 9,150 अरब रुपये) का राजस्व जुटाया है, जो तय लक्ष्य से 4 साल पहले ही हासिल हो गया है।
हालांकि, एक बड़ी चुनौती यह है कि लालफीताशाही और परीक्षकों की कमी के चलते भारत में पेटेंट फाइल करने की प्रक्रिया अभी भी धीमी है। यही वजह है कि कई कंपनियां अपने पेटेंट अमेरिका में फाइल करना ज्यादा पसंद करती हैं।
डैम्लर ट्रक के कोडक्कल कहते हैं कि भले ही डिजिटल सुधारों से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन भारत की नवाचार क्षमता को पूरी तरह से बाहर लाने के लिए अभी और भी बदलावों की जरूरत है। अगर, सिस्टम में सुधार हुआ तो AI इस पूरी प्रक्रिया को और भी तेज गति दे पाएगा।