AI के भारी बिलों ने उड़ाई दिग्गज कंपनियों की नींद
मेटा, अमेजन और उबर जैसी दिग्गज कंपनियां एक समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जमकर खर्च कर रही थीं। ये कंपनियां AI टोकन के इस्तेमाल पर भी पैनी नजर रखती थीं क्योंकि ये AI के काम करने की एक यूनिट होती है, लेकिन अब OpenAI और एंथ्रोपिक जैसे AI प्रतादाओं से आ रहे भारी-भरकम बिलों ने उनकी नींद उड़ा दी है। उबर ने तो कुछ ही महीनों में अपना पूरा साल का AI बजट खत्म कर दिया।
इसी वजह से अब ये कंपनियां AI के इस्तेमाल में फूंक-फूंक कर कदम रख रही हैं और कम खर्च वाले तरीके तलाश रही हैं।
कंपनियां बदल रही अपनी AI रणनीतियां
अब हर काम के लिए महंगे AI मॉडल्स पर पैसे लुटाने के बजाय कंपनियां अपने तरीके बदल रही हैं। मेटा अपने इंजीनियर्स को अपने 'मेटाकोड' टूल का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित कर रही है।
दूसरी तरफ, सेल्सफोर्स ने टोकन काउंट की बजाय 'एजेंटिक वर्क यूनिट्स' का इस्तेमाल करना शुरू किया है। जानकार बताते हैं कि अगर, सिर्फ खास और जरूरी कामों के लिए ही हाई-एंड मॉडल्स का इस्तेमाल किया जाए और बाकी सामान्य कामों के लिए सस्ते विकल्पों को चुना जाए तो लागत में 90 फीसदी तक की कमी आ सकती है। बजट कम होने के बावजूद कंपनियां AI से दूरी नहीं बना रही हैं, बल्कि अब वे इसका और भी समझदारी से इस्तेमाल कर रही हैं।