वैज्ञानिकों ने देखी तारे में विस्फोट की शुरू से लेकर अंत तक की प्रक्रिया
करीब 2 दशकों में ऐसा पहली बार हुआ है, जब खगोलविदों ने एक सुपरनोवा को उसकी विस्फोटक शुरुआत से लेकर पूरी तरह शांत होने तक का पूरा घटनाक्रम देखा है।
यह कमाल आइंस्टीन प्रोब टेलीस्कोप की बदौलत मुमकिन हो पाया। टेलीस्कोप ने 21 मार्च को एक वुल्फ-रेयेट तारे से आती हुई एक्स-रे फ्लेयर को पकड़ा।
यह तारा सूरज से लगभग 30 गुना बड़ा और करीब 50 करोड़ प्रकाश-वर्ष दूर स्थित था।
सुपरनोवा पर करीब 3 महीने तक रखी नजर
वैज्ञानिकों ने करीब 3 महीनों तक इस पूरी घटना पर पैनी नजर रखी, जो पिछले लगभग 2 दशकों में पहली बार मुमकिन हो पाया है।
इस दौरान उन्हें एक दुर्लभ 'शॉक ब्रेकआउट' देखने को मिला, जो तब होता है, जब कोई तारा ढहने लगता है और एक तेज चमक पैदा होती है।
शोधकर्ताओं ने यह भी गौर किया कि इस दौरान कोई गामा-रे बर्स्ट (शक्तिशाली और चमकीले विस्फोट) नहीं हुआ, जिससे यह संकेत मिलता है कि तारे के अंदर का जेट कहीं रुक गया था।
इस खोज से वैज्ञानिकों को यह बेहतर तरीके से समझने में मदद मिली है कि कैसे विशाल तारे खत्म होकर ब्लैक होल में बदल जाते हैं और इन ब्रह्मांडीय विस्फोटों के काम करने के तरीके के बारे में कई नए सुराग भी मिले हैं।