2100 तक 16 फीसदी पौधे हो जाएंगे विलुप्त- शोध में किया दावा
एक अध्ययन में सामने आया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण इस सदी के आखिर तक लगभग 16 फीसदी वैस्कुलर पौधे हमेशा के लिए खत्म हो सकते हैं।
वैज्ञानिकों ने 67,000 से भी ज्यादा वैस्कुलर पौधों की प्रजातियों पर रिसर्च की और पता चला कि कैलिफोर्निया के कैटालिना आयरनवुड और ऑस्ट्रेलिया के यूकेलिप्टस की एक-तिहाई प्रजातियों समेत कई पौधे अपना लगभग पूरा प्राकृतिक ठिकाना गंवा सकते हैं।
यह चेताता है कि अगर, समय रहते हालात नहीं सुधरे तो जिन पौधों को हम सामान्य मानकर चलते हैं वे भी धरती से हमेशा के लिए गायब हो सकते हैं।
पौधों के रहने की जगह में बदलाव
इस शोध में यह दिखाया गया है कि साल 2081 से 2100 के दौरान जलवायु परिवर्तन का पौधों के आवासों पर कैसा असर पड़ेगा। इसके लिए शोधकर्ताओं ने तापमान, बारिश, मिट्टी, जमीन के इस्तेमाल और छाया जैसे कई अहम पहलुओं पर गौर किया है।
भले ही पौधों के बीज नई जगहों पर पहुंच सकें, लेकिन उनका रहने का ठिकाना सिकुड़ता जा रहा है।
इस वजह से अभी भी कई पौधों पर विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है। आर्कटिक क्षेत्र के पौधे अपनी जगह गंवा रहे हैं, क्योंकि ठंड वाले इलाके धीरे-धीरे घटते जा रहे हैं, वहीं पश्चिमी अमेरिका जैसे सूखे से जूझ रहे इलाकों में जंगल की आग और मिट्टी के सूखने का बुरा असर देखने को मिल रहा है। दूसरी ओर, उष्णकटिबंधीय इलाकों में ज्यादा बारिश के कारण पौधों की नई प्रजातियां पनप सकती हैं।
पौधों की विविधता की रक्षा जरूरी
शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि पौधों की संख्या घटने से हवा से कम कार्बन सोखा जाएगा, जिससे जलवायु परिवर्तन की समस्या और गंभीर हो सकती है।
पौधे सिर्फ हरियाली ही बनाए नहीं रखते, बल्कि ये मिट्टी को कटाव से बचाते हैं, वन्यजीवों को आश्रय देते हैं और हमारे पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को सही ढंग से चलाने में अपनी अहम भूमिका निभाते हैं।
शोधकर्ताओं ने साफ कहा है कि अगर, हम भविष्य में एक स्वस्थ प्रकृति और रहने लायक ग्रह चाहते हैं तो पौधों की विविधता को बचाना बेहद जरूरी है।