#NewsBytesExplainer: TMC के बागी सांसद गुमनाम पार्टी से क्यों जुड़े, दलबदल कानून से बचेंगे; आगे क्या?
क्या है खबर?
14 जून को जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसद लोकसभा स्पीकर से मिले तो चर्चा ये थी कि सभी 'असली TMC' पर दावा करेंगे। हालांकि, इसके उलट चौंकाने वाले घटनाक्रम में सभी सांसदों एक गुमनाम क्षेत्रीय पार्टी नेशनल सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हो गए। NCPI त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में थोड़ी बहुत सक्रिय रही है। आइए समझते हैं कि सांसदों ने ये कदम क्यों उठाया।
NCPI
सबसे पहले NCPI के बारे में जानिए
NPCI त्रिपुरा की पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी है। इसका गठन त्रिपुरा विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 20 जनवरी, 2023 को हुआ था। इसका पश्चिम बंगाल से भी संबंध रहा है। दस्तावेजों में उत्तिया कुंडू पार्टी के अध्यक्ष और उनकी पत्नी शेवली कुंडू कोषाध्यक्ष हैं। NCPI ने 2023 के चुनावों में त्रिपुरा की 7 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे, लेकिन 4 सीटों पर नामांकन खारिज हो गए। बाकी सीटों पर उसे केवल 822 वोट मिले।
वजह
NCPI में क्यों शामिल हुए बागी सांसद?
बागी नेताओं का NCPI में शामिल होने का फैसला दल-बदल विरोधी कानून से बचने और 'असली TMC' होने का दावा करने के लिए समय हासिल करने की एक कोशिश है। दरअसल, संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत, कोई भी विधायक या संसद सदस्य जो स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता छोड़ता है या सदन में अपनी पार्टी के निर्देश के खिलाफ वोट करता है, उसे अयोग्य घोषित कर दिया जाता है।
कानून
दलबदल कानून से कैसे बचे बागी सांसद?
दलबदल कानून से बचने के लिए एक शर्त है। 10वीं अनुसूची का पैराग्राफ 4 के मुताबिक, अगर मूल राजनीतिक पार्टी का का किसी अन्य पार्टी में विलय हो जाता है और उस पार्टी के कुल सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई सदस्य विलय के लिए सहमत होते हैं तो अयोग्यता लागू नहीं होगी। फिलहाल बागी सांसदों ने दलबदल से बचने के लिए और अन्य सांसदों का समर्थन जुटाने के लिए विलय का रास्ता चुना है।
असली TMC
क्या TMC पर दावा कर पाएंगे बागी सांसद?
बागी सांसदों के पास ये विकल्प है और उन्होंने ऐसा करने के संकेत भी दिए हैं। बागी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा, "जब आप पार्टी के दो-तिहाई सदस्यों के साथ अलग होते हैं, तो आप पहले ही दिन पार्टी का नाम नहीं मांग सकते। जुलाई में जब संसद का सत्र फिर से शुरू होगा, तो हम 'तृणमूल' नाम की मांग करेंगे क्योंकि हमारे पास दो-तिहाई बहुमत है। तब कोर्ट तय करेगा कि असली TMC कौनसी है।"
आगे क्या
आगे क्या होगा?
अगर 'असली बनाम नकली TMC' की लड़ाई शुरू होती है तो मामला पहले चुनाव आयोग के पास जाएगा। आयोग देखेगा कि पार्टी के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों (सांसदों और विधायकों) में से कितने लोग किस गुट के साथ हैं। आयोग यह भी जांचता है कि पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी, पदाधिकारियों और जिला अध्यक्षों की सूची में से किसका पलड़ा भारी है। इसके बाद मामला कोर्ट तक भी जा सकता है, जो पहले कई मामलों में हुआ है।
TMC
TMC क्या कह रही है?
अभिषेक बनर्जी ने कहा, "कोई भी ऐसा काम जिससे कोई सदस्य या सदस्य खुद को अलग गुट के तौर पर पेश करते हैं, पार्टी के नेता और व्हिप को नहीं मानते, या अलग होकर काम करते हैं, तो इसे पार्टी की सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ने जैसा माना जाएगा और उन्हें अयोग्य ठहराया जा सकता है। साथ ही, पार्टी व्हिप के खिलाफ वोट करने या वोटिंग से दूर रहने पर पैराग्राफ 2(1)(b) के तहत भी अयोग्यता लागू हो सकती है।"