2023 में बनी, केवल 822 वोट मिले; NPCI की कहानी, जिससे जुड़े TMC के बागी सांसद
क्या है खबर?
त्रिपुरा की एक गुमनाम राजनीतिक पार्टी अचानक से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चाओं में आ गई है। इस पार्टी का नाम नेशनल सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) है, जिसमें तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसद शामिल हो गए हैं। ये बागी सांसद NCP से जुड़कर भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का समर्थन करेंगे। त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल से संबंध रखने वाली NCPI 2023 में पंजीकृत हुई थी। आइए इसके बारे में जानते हैं।
पार्टी
2023 में बनी थी NPCI
NPCI त्रिपुरा की पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी है। इसका गठन त्रिपुरा विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 20 जनवरी, 2023 को हुआ था। तब इसे चुनाव आयोग में एक पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी के रूप में पंजीकृत किया गया था। हालांकि, इससे पहले ये पार्टी पश्चिम बंगाल में पंजीकृत थी, लेकिन पहला चुनाव त्रिपुरा में लड़ा था। पार्टी का चुनाव निशान कलम की नोक है। दस्तावेजों में शेवली कुंडू को पार्टी का कोषाध्यक्ष बताया गया है।
कोषाध्यक्ष
कौन हैं पार्टी के अध्यक्ष?
NCPI के पते पर पंजीकृत 2 संगठनों में भी शेवली कुंडू निदेशक हैं। इनके नाम है- बिस्वबाजार प्राइवेट लिमिटेड (नवंबर 2021 से निदेशक) और पश्चिम बंगा असंगथिता महिला कर्मी एसोसिएशन (अक्टूबर 2020 से निदेशक)। NCPI का पंजीकृत पता बंगाल के हावड़ा जिले के बानीपुर क्षेत्र में है। पार्टी के अध्यक्ष शेली कुंडू के पति उत्तिया कुंडू हैं। उनकी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथ एक तस्वीर भी सामने आई थी।
चुनाव
विधानसभा चुनाव में मिले थे केवल 822 वोट
NCPI ने अपना पहला चुनाव बंगाल के बजाय त्रिपुरा से लड़ा था। 2023 के चुनावों में त्रिपुरा की 7 विधानसभा सीटों पर NCPI ने अपने उम्मीदवार खड़े किए थे, लेकिन 4 सीटों पर उसके उम्मीदवारों के नामांकन पत्र खारिज कर दिए गए। इसके बाद NCPI ने केवल 2 सीटों पर चुनाव लड़ा और एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन किया। छवामनु सीट पर पार्टी उम्मीदवार को 536 और कैलाशहर सीट पर 286 वोट मिले।
बयान
पार्टी उम्मीदवार बोले- चुनाव बाद कुंडू से कोई संपर्क नहीं
कैलाशहर से उम्मीदवार जहांगीर अली ने NDTV से कहा, "2023 के चुनावों के दौरान कोलकाता से आए शेवली कुंडू ने हमसे उम्मीदवार बनने के लिए संपर्क किया था। चुनाव के बाद उन्होंने अपना काम बंद कर दिया और वापस चले गए। हमारा उनसे संपर्क भी टूट गया।" एक अन्य पूर्व उम्मीदवार बरजेदा त्रिपुरा ने कहा, "उन्होंने मुझसे कोई पैसा नहीं मांगा और प्रचार भी नाममात्र का था। चुनाव के बाद मेरा उनसे पूरी तरह से संपर्क टूट गया।"