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कांग्रेस ने भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को क्यों दी पंजाब प्रभारी पद की जिम्मेदारी?
कांग्रेस ने चुनावी राज्य पंजाब में संगठनात्मक फेरबदल किया है

कांग्रेस ने भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को क्यों दी पंजाब प्रभारी पद की जिम्मेदारी?

लेखन आबिद खान
Sep 06, 2026
10:11 am

क्या है खबर?

पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने संगठन में बड़ा बदलाव किया है। कांग्रेस ने पंजाब में महासचिव प्रभारी के रूप में भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को नियुक्त किया है। बघेल दिसंबर, 2023 में कांग्रेस के पंजाब प्रभारी बनाए गए थे। साथ ही बघेल को असम में नई जिम्मेदारी महासचिव प्रभारी के तौर पर दी गई है। इसके अलावा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और गुजरात के प्रभारी को भी बदला गया है।

नियुक्तियां

कहां-कहां हुए बदलाव?

कांग्रेस ने असम और पंजाब के अलावा छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और गुजरात के प्रभारियों को भी बदला है।

अब रणदीप सुरजेवाला को गुजरात, सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़, श्रीवेला प्रसाद को महाराष्ट्र और पीवी मोहन को आंध्र प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया गया है। साथ ही सुरजेवाला कर्नाटक में प्रभारी के रूप में जिम्मेदारी निभाते रहेंगे।

पार्टी ने ये भी बताया कि मुकुल वासनिक AICC महासचिव के रूप में काम करते रहेंगे।

गुटबाजी

गुटबाजी को नहीं रोक पाए थे बघेल

पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के बीच गुटबाजी खुलकर सामने आ गई थी। इससे न सिर्फ पार्टी की छवि खराब हुई, बल्कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का राज्य की प्रस्तावित यात्रा भी टालना पड़ी।

न्यूज18 के मुताबिक, चन्नी के साथ विवाद में राज्य कांग्रेस अध्यक्ष वड़िंग का 'पक्ष लेने' के आरोपों के बीच पंजाब इकाई में बघेल की स्थिति कमजोर हो गई थी।

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बयान

कथित तौर पर वड़िंग का पक्ष ले रहे थे बघेल

न्यूज18 से कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने कहा कि बघेल को वड़िंग का करीब माना जा रहा था। विरोधी गुटों ने शीर्ष नेतृत्व से शिकायत की थी कि बघेल मतभेदों को सुलझाने में अनुचित व्यवहार कर रहे थे।

इस बारे में राहुल को रिपोर्ट सौंपी गई थी, जिसने दूसरे खेमे में असंतोष पैदा कर दिया।

चन्नी के करीबी नेताओं ने यह भी दावा किया है कि बघेल पंजाब की स्थिति को आलाकमान तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में असफल रहे।

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पायलट

पायलट को क्यों दी गई जिम्मेदारी?

कांग्रेस सूत्रों ने पायलट को युवा मतदाताओं के बीच लोकप्रिय और ऊर्जावान जमीनी नेता बताया है और 2018 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत में सहायक संगठनात्मक कार्यों का श्रेय उन्हें दिया है।

कांग्रेस का मानना है कि पायलट राजस्थान में अशोक गहलोत के साथ मतभेद के दौरान दोनों पहलुओं का अनुभव कर चुके है- एक स्थापित नेता को चुनौती देने और एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जिसका अपना खेमा आलाकामान द्वारा प्रबंधित किया जाना था।

चुनौतियां

पायलट के सामने कई चुनौतियां

पंजाब कांग्रेस में कई गुट हैं। वडिंग, चन्नी, प्रताप सिंह बाजवा और एसएस रंधावा समेत कई नेताओं का अपना समर्थक धड़ा है। पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन सभी गुटों को साथ लाना है।

कांग्रेस आलाकमान ने संदेश दिया है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर लड़ने के बजाय पहले आम आदमी पार्टी (AAP) को हराने को प्राथमिकता दें।

उम्मीद है राहुल जल्द ही राज्य की सभी सीटों पर बस यात्रा भी कर सकते हैं।

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