तमिलनाडु: कांग्रेस और TVK क्यों आ रहे नजदीक? राज्य के सियासी समीकरणों पर क्या होगा असर?
क्या है खबर?
तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के थलापति विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। इस दौरान मंच पर बड़े नेता के तौर पर राहुल गांधी की मौजूदगी ने सबका ध्यान खींचा है। शपथ ग्रहण के बाद विजय ने राहुल के साथ सेल्फी ली और राहुल ने बधाई भी दी। नतीजों के बाद सबसे पहले कांग्रेस ने ही TVK को समर्थन भी दिया था। आइए TVK-कांग्रेस की नजदीकी की वजह जानते हैं।
शपथ ग्रहण
चुनाव बाद कैसे बढ़ी कांग्रेस-TVK की नजदीकी?
राहुल इकलौते बड़े नेता थे, जो विजय के शपथ ग्रहण में शामिल हुए। उन्होंने समारोह की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर साझा की। विजय की जीत के बाद राहुल ने उनसे 3 बार फोन पर बात की। रिपोर्ट के मुताबिक, जब विजय बहुमत जुटाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, तब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ही अन्य पार्टियों से बात कर समर्थन देने के लिए मनाया। इस दौरान राहुल भी सक्रिय थे।
पहली मुलाकात
राहुल ने विजय को ऑफर किया था तमिलनाडु यूथ कांग्रेस अध्यक्ष पद
राहुल और विजय के बीच राजनीतिक और वैचारिक तालमेल की कहानी 2009 में शुरू हुई थी। तब दोनों नेताओं के बीच राजनीति, सिनेमा और विजय के संगठन विजय मक्कल इयक्कम (VMI) को लेकर बातचीत हुई थी। तब राहुल यूथ कांग्रेस के प्रभारी थे। रिपोर्ट के मुताबिक, उस दौरान राहुल ने विजय को तमिलनाडु यूथ कांग्रेस के प्रमुख का पद भी ऑफर किया था। हालांकि, तब विजय राजनीति में आने को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं थे।
वजह
TVK और कांग्रेस की नजदीकी की क्या है वजह?
राहुल को लगता है कि विजय दक्षिण भारत में धर्मनिरपेक्ष ध्रुव की तरह हैं, जिन पर वे भरोसा कर सकते हैं। विधानसभा चुनावों से पहले सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस और DMK में सहमति नहीं बन पाई थी। स्टालिन की सरकार में कांग्रेस सहयोगी जरूर थी, लेकिन सरकार में शामिल नहीं थी। स्टालिन ने सीटों को लेकर कांग्रेस की मांग को ठुकरा दिया था। ऐसे में कांग्रेस को विजय के साथ जाना सबसे मुफीद लगा।
फायदा
विजय के साथ आने से कांग्रेस को क्या फायदा?
दशकों तक कांग्रेस तमिलनाडु में सीमित सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पार्टी का मानना है कि विजय के साथ जुड़ाव युवाओं और पार्टी के पारंपरिक प्रभाव क्षेत्रों से परे विस्तार करने में मदद कर सकता है। चुनावों से पहले ही DMK ने सत्ता साझा करने से इनकार कर दिया था। कांग्रेस और DMK ने 2004 से लेकर अब तक सभी चुनाव साथ लड़े हैं (2014 लोकसभा चुनाव को छोड़कर) लेकिन इस दौरान कांग्रेस की सीटें कम होती गईं।
DMK
DMK ने कांग्रेस के कदम को धोखेबाजी बताया
कांग्रेस द्वारा TVK को समर्थन करने का ऐलान करते ही DMK ने इसे पीठ में छुरा घोंपना बताया था। DMK प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने कहा था, "कांग्रेस का फैसला भरोसे लायक नहीं था। कांग्रेस के इस कदम से पूरे देश में राजनीतिक सहयोगियों को एक गलत संदेश जा रहा है।" DMK ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर अपने सांसदों के बैठने की व्यवस्था में भी बदलाव की मांग की थी।
TVK
विजय के पिता ने पहले ही कांग्रेस को दिया था ऑफर
चुनाव से पहले विजय के पिता एसए चंद्रशेखर ने कहा था, "कांग्रेस का एक लंबा इतिहास और विरासत है। कांग्रेस ने स्वतंत्रता संग्राम लड़ा और अब यह एक ऐसी पार्टी है जिसका प्रभाव कम हो रहा है। ऐसी कांग्रेस का पतन क्यों हो रहा है? विजय उन्हें समर्थन देने और उनकी पुरानी प्रतिष्ठा वापस दिलाने के लिए तैयार हैं। कांग्रेस उनके साथ गठबंधन करे और विजय उनको खोई हुई शक्ति वापस दिलाएंगे।"
असर
राज्य की राजनीति पर क्या होगा असर?
कांग्रेस के इस कदम का DMK के साथ रिश्तों पर असर होगा ही। स्टालिन उन पहले नेताओं में से थे, जिन्होंने राहुल का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए आगे बढ़ाया था। राहुल ने भी एक रैली में स्टालिन को भाई कहकर संबोधित किया था। इसका असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी दिखाई देगा। INDIA गठबंधन और कमजोर होगा और विरोधियों को निशाना साधने का मौका मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ही कहा कि कांग्रेस केवल धोखा देना जानती है।