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6 बार के विधायक, वकील और पर्यावरणविद; कौन हैं केरलम के नए मुख्यमंत्री वीडी सतीशन?
वीडी सतीशन केरलम के नए मुख्यमंत्री होंगे

6 बार के विधायक, वकील और पर्यावरणविद; कौन हैं केरलम के नए मुख्यमंत्री वीडी सतीशन?

लेखन आबिद खान
May 14, 2026
01:10 pm

क्या है खबर?

लंबी खींचतान के बाद आखिरकार कांग्रेस ने केरलम के मुख्यमंत्री का नाम घोषित कर दिया है। पार्टी नेतृत्व ने वीडी सतीशन पर भरोसा जताया है। अब वे केरलम के अगले मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। उनके अलावा संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के नाम सबसे आगे चल रहा था, लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं की पसंद सतीशन थे। 6 बार के विधायक और वकील रहे सतीशन विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे हैं।

शुरुआती जीवन

केरल हाई कोर्ट में वकील रहे हैं सतीशन

सतीशन का जन्म 31 मई, 1964 को एर्नाकुलम जिले के नेत्तूर में हुआ था। उनके पिता वन विभाग में अधिकारी थे। उन्होंने सामाजिक कार्यों में पोस्ट ग्रेजुएशन की है। इसके बाद उन्होंने तिरुवनंतपुरम के सरकारी कॉलेज से वकालत की भी पढ़ाई की। राजनीति में आने से पहले सतीशन ने कुछ सालों के लिए केरल हाई कोर्ट में वकालत भी की है। उनकी शादी आर लक्ष्मी प्रिया से हुई है और दंपत्ति की एक बेटी है।

राजनीति

पहला विधानसभा चुनाव हार गए थे सतीशन

80 के दशक में सतीशन छात्र राजनीति में सक्रिय हुए। 1986 में वे महात्मा गांधी विश्वविद्यालय संघ के अध्यक्ष बने। उन्होंने कांग्रेस की छात्र इकाई नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के सचिव के रूप में भी काम किया है। सतीशन ने 1996 में पारावूर से अपना पहला विधानसभा चुनाव लड़ा। तब उन्हें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार पी राजू से केवल 1,116 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। पारावूर उस समय कम्युनिस्टों का गढ़ माना जाता था।

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विधायक

पहली हार के बाद पारावूर से लगातार 6 चुनाव जीते सतीशन

हार के बावजूद सतीशन विधानसभा में सक्रिय रहे। 2001 में उन्होंने पारावूर से पहला चुनाव जीता और विधायक बने। इस वक्त तक वे हाई कोर्ट में वकालत भी करते थे। इसके बाद लगातार इस सीट से 6 चुनाव जीते और इसे कांग्रेस के सबसे मजबूत गढ़ में से एक बना दिया। 2021 में उन्हें विधानसभा में विपक्ष का नेता नियुक्त किया गया। हालिया विधानसभा चुनाव में उन्होंने CPI के ईटी टाइसन को 20,000 से ज्यादा वोटों से हराया है।

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उदय

कैसे बढ़ता गया राजनीति में कद?

बतौर नेता विपक्ष सतीशन विधानसभा में विरोध की सबसे तीखी आवाज और मुद्दों का बारीकी से विश्लेषण करने के लिए चर्चित रहे। उन्होंने गुटबाजी से दूरी बनाई और मुद्दों पर आधारित राजनीति पर ध्यान दिया। उनके नेतृत्व में UDF ने 2024 लोकसभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन करते हुए 20 में से 18 सीटें जीतीं। 2025 के निकाय चुनावों में UDF की सफलता ने कांग्रेस के भीतर सतीशन की स्थिति को और मजबूत किया।

नाराजगी

कभी नजरअंदाज होने पर जताई थी निराशा

कांग्रेस में होने वाली गुटबाजी के चलते कई मौकों पर सतीशन को नजरअंदाज किया गया। वे KSU अध्यक्ष पद, युवा कांग्रेस अध्यक्ष पद, KPCC अध्यक्ष पद और 2011 में मंत्री पद की दौड़ में शामिल थे, लेकिन मौका नहीं दिया गया। बाद में सतीशन ने स्वीकार किया था कि कई मौके उनके हाथ से निकल गए। हालांकि, 2021 में जब उन्हें नेता विपक्ष बनाया गया तो उन्होंने कहा कि इस फैसले ने सभी छूटे हुए मौकों की भरपाई कर दी।

पर्यावरणविद

पर्यावरण से जुड़े मुद्दे उठाते रहे हैं सतीशन

सतीशन उन गिने-चुने नेताओं में से हैं, जो लगातार पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहते हैं। उन्होंने पश्चिमी घाट की सुरक्षा पर माधव गाडगिल समिति की रिपोर्ट का खुलकर समर्थन किया था। इसके चलते उन्हें कांग्रेस के भीतर ही विरोध का सामना करना पड़ा। 2024 में वायनाड में हुए भूस्खलन के बाद सतीशन ने राज्य सरकार की आपदा प्रबंधन योजनाओं की सुस्त गति की आलोचना की और सतत विकास नीतियों को अपनाने का समर्थन किया।

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