पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक मतदान, क्या बदलेगी सत्ता? जानिए क्या कहते हैं पिछले आंकड़े
क्या है खबर?
पश्चिम बंगाल में लोगों ने मतदान में बढ़ृ-चढ़कर हिस्सा लिया है। यहां शाम 6 बजे तक 91 प्रतिशत मतदान हुआ है, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। इससे पहले 2006, 2011, 2016 और 2021 में भी 80 प्रतिशत से ज्यादा मतदान हुआ था। 2011 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 34 साल से सत्ता पर काबिज लेफ्ट को हराया था। उसके बाद से लगातार TMC राज्य की सत्ता में बनी हुई है। आइए राज्य का मतदान ट्रेंड समझते हैं।
2021 चुनाव
2021 चुनाव में क्या हुआ था?
2021 के विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में 82.30 प्रतिशत मतदान हुआ था। हालांकि, तब 7 चरणों में चुनाव हुए थे। तब TMC ने 215 सीटें जीती थीं और उसे 48.02 प्रतिशत वोट मिले थे। ये पिछले चुनाव से 3.11 प्रतिशत ज्यादा थे। उसे 4 सीटों का फायदा हुआ था। भाजपा को 37 प्रतिशत वोट मिले थे, जो पिछले चुनाव से 27 प्रतिशत ज्यादा थे और उसे सीधे-सीधे 74 सीटों का फायदा हुआ था।
2016 चुनाव
2016 विधानसभा चुनाव के आंकड़े जानिए
2016 में भी बंगाल में 7 चरणों में चुनाव हुए थे और 82.66 प्रतिशत मतदान हुआ था। तब TMC को 44.94 प्रतिशत वोट मिले थे और उसने 211 सीटें जीत थीं। उसे 27 सीटों का फायदा हुआ था। उसके बाद CPI(M) को 19.75 प्रतिशत वोट के साथ 26 सीटें मिली थीं। पार्टी को 14 सीटों का नुकसान हुआ था। कांग्रेस को 44 और भाजपा को 3 सीटें मिली थीं।
2011 चुनाव
2011 में आखिरी बार बदली थी सत्ता
2011 में हुए 6 चरणों के चुनाव में 84 प्रतिशत मतदान हुआ था। ये बंगाल के इतिहास का सबसे बड़ा मतदान प्रतिशत था। इसी के साथ TMC ने राज्य में 34 साल से चली आ रही लेफ्ट की सत्ता को हटाया था। तब TMC ने 184, कांग्रेस ने 42 और CPI(M) ने 40 सीटें जीती थीं। TMC को 154 और कांग्रेस को 21 सीटों का फायदा हुआ था। CPI(M) की सीटों में 136 की कमी आई थी।
संकेत
क्या संकेत दे रहे हैं आंकड़े?
2011 के चुनाव में रिकॉर्ड 84 प्रतिशत मतदान राज्य के राजनीतिक इतिहास में अहम साबित हुआ, क्योंकि तब TMC ने लेफ्ट के 34 साल के लगातार शासन को खत्म किया। हालांकि, इसके बाद भले ही मतदान प्रतिशत 80 से ज्यादा रहा हो, लेकिन 2016 और 2021 में सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ। इसके उलट बढ़े मतदान प्रतिशत ने राजनीतिक निरंतरता को मजबूत किया और TMC को लगातार प्रतिस्पर्धी मुकाबलों के बावजूद जनादेश मिला।
वजह
पश्चिम बंगाल में क्यों होता है ज्यादा मतदान?
इसके पीछे कई वजहें हैं। जानकारों का मानना है कि पार्टियों के बीच सख्त प्रतिस्पर्धा, जमीनी स्तर पर बड़ा कैडर और महिलाओं की ज्यादा संख्या को जिम्मेदारी मानते हैं। इस बार SIR भी बड़ा कारण माना जा रहा है। राज्य में SIR की प्रक्रिया को लेकर खूब विवाद रहा है। मतदाताओं को डर है कि वोट न डालने पर उनका नाम मतदाता सूची से कट सकता है। इसलिए लोग मतदान में भाग ले रहे हैं।